सोयाबीन के बिजवारे के लिये भटक रहा है किसान, बाजार में बिक रहा है अमानक बीज

महावीर अग्रवाल
मन्दसौर १५ जून ;अभी तक;  राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ मन्दसौर जिलाध्यक्ष महेश व्यास लदूसा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान को पत्र लिखकर मंदसौर जिले के किसानों की समस्याओं से अवगत कराते हुए उनके निराकरण की मांग की है।
                       महेश व्यास लदूसा ने पत्र में कहा कि मंदसौर जिले के किसानों के साथ जिस प्रकार भेदभाव हो रहा है यह जानकर आप भी स्तब्ध रह जाएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए कह कि मंदसौर जिले के कृषि विभाग  के अधिकारी, कर्मचारी अभी तक कुंभकर्णी नींद में सौ रहे है। जिले का किसान सोयाबीन के बिजवारे के लिये भटक रहा है। अमानक बीज बाजार से खरीदकर दस हजार रू. क्विंटल तक के पैसे अदा कर रहा है। फिर भी उस बीज की कोई ग्यारंटी नहीं कि वह कितने प्रतिशत गुणवत्ता युक्त है क्योंकि जब जिले में फसल पक कर तैयार होकर मंडियों में पहुंची तब व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर स्टॉक किया गया क्योंकि उन्हें मुनाफा जो कमाना था। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि इस वर्ष 2020 में सोया बीज फसल में वायरस आया हुआ है। उन्हें तो सिर्फ कमाई दिखी और गीला-सुखा माल वेयर हाउस में स्टॉक किया लेकिन उसके अन्दर अंकुरण क्षमता रही नहीं  फिर भी उसी बीज को धड़ल्ले से किसानों को बेचा जा रहा है। लेकिन कृषि विभाग के अधिकारियों के कान पर आज तक जूं तक नहीं रेंगी। यह हाल केवल मंदसौर जिले के ही नहीं है, जिन जिलों में पिछले वर्ष बाड़ आई थी वहां पर भी यही हाल है।
                    श्री व्यास ने बताया कि उन्हें 2 दिन पूर्व दमोह जिले के एक किसान अमुल भाई राठौड़ का फोन आया उन्होनंे भी यही पीड़ा बताई की सोया बीज नहीं मिल रहा है। तो मैंने उनसे यही कहा कि कृषि विभाग सहकारी समितियों से ले लो तो वह बता रहे थे कि वह बीज में अंकुरण नहीं हो रहा है। व्यापारी 10 हजार से उपर ही बेच रहे हे। अगर नहीं मिलता है तो खेत खाली छोड़ देंगे या उड़द, मुंग लगा देंगे। बरसों से जमें कृषि विभाग अधिकारी न कभी खेतों में गये, ना किसान की पीड़ा को समझते, नहीं कभी समय पर बाड़, पाला, औले जैसे प्राकृति आपदा में सही समय पर सही मूल्यांकन नहीं किया। 2019 मे जब बाढ़ से समूचे किसान परिवार सरकार से मदद की आस लगाये बैठा था कि समय पर मुआवजा मिलेगा लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण इन्हीं लोगों की वजह से आज भी जिले के सैकड़ों अन्नदाता मुआवजे की वाट देखते रह गये। मुख्यमंत्री के द्वारा 2018 के घोषणा पत्र में सोयाबीन के उपर 500 रू. प्रति क्विंटल बोनस देने की बात कही गई थी लेकिन यह भी उस अन्नदाता को नसीब नहीं हुई इससे और दुर्भाग्यपूर्ण बात में बता रहा हूॅ कि वर्ष 2018-19 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने प्रदेश के किसानों का प्याज भावान्तर योजना में खरीदा था उस एक माह में किसान अपना सारा प्याज 300$400 रू. भाव में उस 800 रू. के बीच थी अन्तर की राशि के चक्कर में बेच कर बैठ गया और जैसे ही भावान्तर योजना का समय खत्म हुआ और प्याज भाव 13 रू. से 50 रू. की कीमत पर मंडी में बिका। किसान अपने आपको ठगा महसूस करता रह गया और आज तक भावान्तर राशि उसके खाते में नहीं पहुंची। मैंने कई बार जिला कलेक्टर को इस विषय को लेकर ध्यान आकर्षण कराया और ज्ञापन भी दिये। लेकिन उन्होनंे भी फंड की कमी का हवाला देकर यही कहा कि प्रदेश सरकार जब भी राशि जारी करेगी। राशि का वितरण कर दिया जाएगा लेकिन वह समय आज तक नहीं आया। इसलिये निवेदन है कि भावांतर योजना में भारी भ्रष्टाचार होता है। सीधे किसान को इसका फायदा नहीं होता लेकिन दलाल जरूर मालामाल होते है। अगर भावान्तर योजना को सफल बनाना ही है तो मेरा एक सुझाव है कि इस योजना को वर्ष भर जारी रखे ताकि किसान समय सीमा में नहीं बंधे व मंडिया में भाव ज्यादा हो तो वहां बेचे और अगर भाव गिरने की संभावना हो तो इस योजना में बेचकर उचित दाम प्राप्त कर सके। इससे सरकार के खजाने के उपर भी  अधिक भार नहीं पड़े और किसान इसका फायदा उठा सके।
महेश व्यास लदूसा ने मुख्यमंत्री से मांग की कि सोयाबीन की बोनस की राशि प्रदान की जावे। प्याज भावांतर राशि केवल मंदसौर जिले की बाकी रही है, वह राशि जल्द जारी करे। 2019 के समय बाढ़ पीड़ित किसानों की मुआवजा राशि जल्द उनके खाते में डाले। सोयाबीन बीज की उपलब्धता जल्द करावे। 2020 खरीफ सोयाबीज के बीमे की राशि भी जल्द अन्नदाता के खाते में डाली जाए ताकि कोरोना काल में किसान परिवार को मदद मिले।