स्तनपान नवजात शिशुओं के लिए अम्रत के समान है-दीपक राजपूत

9:27 pm or October 23, 2022
(दीपक शर्मा)
पन्ना २३ अक्टूबर ;अभी तक; कलेक्टर संजय कुमार मिश्र के निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस. उपाध्याय के मार्गदर्शन में डीसीएम दीपक सिंह राजपूत, शहरी आशा कार्यकर्ता एवं उत्कृष्ट शिक्षा एवं स्वास्थ्य महिला समिति, पन्ना की सचिव श्रीमती वर्षा शुक्ला के द्वारा जिला चिकित्सालय पन्ना में गर्भवती माताओं से भेंट कर, उन्हें स्तनपान एवं बच्चों को स्वस्थ रखने हेतु समझाइश दी गई, .
                        उन्होंने बताया कि हर मां बाप का सपना होता है, कि हमारा बच्चा या बच्ची स्वस्थ, सुंदर, बुद्धिमान और बलशाली हो, इसके लिए आप सभी को प्रारंभ से ही ध्यान रखना है, छोटी-छोटी बातें बहुत ही महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन परिवार एवम् माता-पिता  नवजात के प्रति लापरवाही के कारण, नवजात बीमारी की कारण बन सकती है या फिर उसे कुपोषण की श्रेणी में ला सकती हैं, इसलिए आप सभी गर्भवती माताओं से अनुरोध है, कि जन्म के 1 घंटे के भीतर नवजात शिशु को मां का दूध पिलाएं, स्तनपान कराते समय हमेशा पोजीशन सही रखें, कभी भी लेटाकर बच्चे को स्तनपान ना कराएं, हमेशा बैठकर स्तनपान कराएं, पोजीशन सही रखें और स्तनपान कराने के बाद बच्चे को गले से लगाए, पीठ थप थपाए, ताकि पेट की गैस पास हो जाए, उसे डकार आ जाए, कई बार पीठ नही थपथपाने से भी बच्चों को समस्याएं हो जाती हैं, जो माताएं जन्म के 1 घंटे के भीतर अमृत समान दूध अपने बच्चे को पिलाती हैं, उन बच्चों में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती, बच्चे का शारीरिक विकास सही होता है, .
                        डीसीएम दीपक सिंह राजपूत ने बताया कि 6 माह तक केवल और केवल स्तनपान ही कराएं, किसी तरह की कोई जन्म घुट्टी या ऊपरी आहार देने की आवश्यकता नहीं है, 6 माह बाद फिर आप पूरक आहार दे सकते हैं, स्तनपान कराने से मां और बच्चे के बीच जुड़ाव हो जाता है, नवजात शिशु का तापमान नियंत्रित हो जाता है, जिन बच्चों को शुरू से ही मां ने दूध पिलाया होगा, वह दूसरे बच्चों की तुलना में बीमारी का खतरा कम रहता है, बच्चे के वजन में वृद्धि होने लगती है, जन्म से लेकर 6 माह यानी 180 दिन तक शिशु को मां का अमृतुल्य ही दूध पिलाना है, मां बच्चे को जितना स्तनपान कराती है, मां के शरीर मैं उतना ही दूध बनता है, इसलिए समय-समय पर स्तनपान जरूर कराएं, स्तनपान को लेकर जो बाधाएं आती हैं, जैसे जन्म के बाद का गाढ़ा दूध होता है, उसको लेकर भ्रांतियां होती हैं।