हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास एवं जुर्माना  

पन्ना से दिलीप शर्मा (दीपक)

पन्ना

 ३ सितम्बर ;अभी तक;  न्यायालय, द्वितीय सत्र न्यायाधीश पन्ना द्वारा चिन्हित, जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण में फैसला सुनाते हुये, हत्या के आरोपी जिन्दू उर्फ जितेन्द्र लोध को आजीवन कारावास एवं जुर्माना के अर्थदण्ड से दंडित किया।
                जिला लोक अभियोजन अधिकारी पन्ना के मीडिया सेल प्रभारी ऋषिकांत द्विवेदी ने बताया कि, फरियादी सुरेश पिता पुन्ना प्रजापति उम्र 20 वर्ष ग्राम-मकरी के अनुसार मजदूरी का काम करता हूं दिनांक 27.02.18 को समय 3.30 बजे दोपहर को मेरे चाचा रामनाथ की लडकी घर से हरयारी लेने मनोटा हार गई थी जो अपने साथ एक लोहे का खुरपा व एक टुकनिया लिये थी शाम जब वापिस नहीं लौटी तो गांव के छोटे यादव, प्रदीप अहिरवार, बबलू प्रजापति को साथ में लेकर तलाश करने पर चाचा की लडकी मनोटा हार में रामेश्वर लोध के खेत में अरहर की फसल में मृत अवस्था में पडी मिली। लडकी के चेहरे, सिर, हाथ में कई जगह धारदार हथियार के घाव लगे थे खुरपा व शव पर खून लगा हुआ था, उक्त सूचना के आधार पर थाना-धरमपुर में असल अपराध क्र. 27/18 पर धारा 302 भा.द.सं. पर अपराध पंजीबद्ध किया गया उक्त घटना की विवेचना पूर्ण होने पर आरोपी को गिरफतार कर न्यायालय के समक्ष अभियोग-पत्र प्रस्तुत किया गया एवं न्यायालय ने आरोप में धारा 354 भा.द.सं.,एवं एससीएसटी एक्ट की धारा 3(2) (अ) का इजाफा किया गया।
             प्रकरण की गंभीरता को देखते हुये, उक्त प्रकरण शासन द्वारा चिन्हित, जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण के रूप में चिन्हित किया गया। प्रकरण का विचारण माननीय न्यायालय द्वितीय सत्र न्यायाधीश, पन्ना के न्यायालय में हुआ। शासन की ओर से प्रकरण की पैरवी प्रवीण कुमार सिंह, अति.जिला लोक अभियोजन अधिकारी, पन्ना द्वारा करते हुये न्यायालय के समक्ष अभियोजन साक्षियों को बिन्दुवार तरीके से न्यायालय के समक्ष अभिलिखित कराकर आरोपी के विरूद्ध अपराध संदेह से परे प्रमाणित किया गया, तथा आरोपी के किए गए कृत्य को गंभीरतम श्रेणी का अपराध मानते हुये अधिक से अधिक दंड से दंडित किये जाने का निवेदन किया गया, जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा अभिलेख पर आई साक्ष्यों, अभियोजन के तर्को तथा न्यायिक-दृष्टांतो से सहमत होते हुए जिन्दू उर्फ जितेन्द्र लोध, उम्र-28 वर्ष, निवासी-ग्राम मकरी, थाना-धरमपुर, जिला-पन्ना को धारा 302 भा.द.वि. एवं धारा 3(2) (अ) एससीएसटी एक्ट में दोषी मानते हुय आजीवन कारावास एवं 02-02 हजार रूपये के अर्थदण्ड से, दंडित किया गया।