हफ्तों बाद रिपोर्ट, वर्षों बाद सजा जिले में मिलावट का बाजार जोरों पर

मंडला संवाददाता
मंडला. २७ दिसंबर ;अभी तक;  जिले में मिलावटी खाद्य सामग्रियों का कारोबार जमकर फल फूल रहा है क्योंकि यहां न ही नियमित रूप से खाद्य सामग्रियों के सैंपल लिए जा रहे हैं और न ही उनकी रिपोर्ट सही समय पर प्रयोगशाला से पहुंच रही है। यदि कोई मिलावटखोर के सामग्री में मिलावट की पुष्टि हो भी जाए तो उसे सजा एक या दो वर्षों बाद नहीं बल्कि कई वर्षों बाद मिल रही है। यही कारण है कि जिले में मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं।
                     खाद्य सुरक्षा अधिकारी वंदना जैन ने बताया कि जिले में खाद्य नमूनों के परीक्षण के लिए एक भी प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं है। जिले के अधिकारियों को जिले के खाद्य संबंधित दुकानों से लिए गए सैंपलों  को एकत्र करके भोपाल स्थित प्रयोगशाला में भेजना पड़ता है। प्रयोगशाला से 14 दिनों के अंदर सैंपल की रिपोर्ट वापस जिला मुख्यालय पहुंचना चाहिए लेकिन सैंपल की अधिकता के कारण भोपाल स्थित प्रयोगशाला से सैंपल के रिपोर्ट आने में हफ्तों लग जाते हैं और कई बार महीने भी। दरअसल प्रदेश में खाद्य सैंपलिंग के नमूनों के परीक्षण के लिए भोपाल में ही एक प्रयोगशाला उपलब्ध है। जहां विभागीय अधिकारियों द्वारा सैंपल भेजे जाते हैं।
                   गौरतलब है कि प्रदेश में 52 जिले हैं जहां से भेजे जाने वाले सैंपल का परीक्षण भोपाल स्थित प्रयोगशाला में ही होता है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले से भेजे जाने वाले नमूनों की रिपोर्ट कब तक आती होगी?
हर अधिकारी को 70 का लक्ष्य
                    खाद्य सामग्रियों की जांच पड़ताल के लिए जिले को 3 जोन में बांटा गया है और प्रत्येक जोन में एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति की गई है जो अपने क्षेत्र से खाद्य नमूनों को एकत्र कर भोपाल स्थित प्रयोगशाला में भेजते हैं। प्रत्येक जोन के लिए वर्ष भर में 70 नमूनों का एकत्रीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस तरह 3 जोन से कुल 210 सैंपल लिए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
                     जिले के पहले जोन में निवास एवं बीजाडांडी विकासखंड, दूसरे जोन में मंडला, मोहगांव एवं मवई को, तीसरे जोन में नैनपुर बिछिया एवं घुघरी विकासखंड शामिल किए गए हैं।
मोबाइल वैन महीने में एक बार
                       मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब वैन एक महीने में एक बार जिले में भेजी जाती है। वैन पहुंचने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी मौके पर ही सैंपल लेकर उसकी टेस्टिंग करते हैं और नमूने में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका होने पर उसे भोपाल स्थित प्रयोगशाला भेजा जाता है।
7 वर्षों बाद आया निर्णय
                           खाद्य सुरक्षा अधिकारी वंदना थांगले द्वारा  9 जनवरी 2013 को ग्राम मोहगांव स्थित मलिक किराना दुकान पर जाकर विक्रेता खाद्य कारोबार कर्ता मोहम्मद सईम की दुकान में जांच की थी। सेल्फ  में रखे कंपनी पैक मिलन शक्ति मसाले, स्टैण्डर्ड ग्रेड, हल्दी पाउडर 500 ग्राम के पैकटों में अमानक एवं असुरक्षित खाद्य होने की आशंका होने पर विक्रेता से उक्त खाद्य पदार्थ का नमूना जांच के लिए लिया गया।  विधि अनुसार नमूना लेते हुए चार भागों में सीलबंद किया गया तथा लिए गए नमूने को अभिहित अधिकारी के माध्यम से राज्य खाद्य प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजा गया। राज्य प्रयोगशाला की रिपोर्ट में भेजे गए नमूना असुरक्षित होने पर विक्रेता, डायरेक्टर द्वारा केन्द्रीय प्रयोगशाला से लिए गए सेंपलों का परीक्षण कराया गया। जिसकी रिपोर्ट भी असुरक्षित होने से मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडला के समक्ष खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा परिवाद प्रस्तुत किया गया। हाल ही में न्यायालय के द्वारा अभियुक्तगण मोहम्मद सईम पिता मोहम्मद हमीद को सजा सुनाई गई।