हमारे नेताओं को सच तो बोलने दीजिए 

महावीर अग्रवाल
मंदसौर ४ मई ;अभी तक;  प्रदेश के पूर्व मंत्री श्री नरेन्द्र नाहटा ने अपने एक लेख में लिखा है कि इस सप्ताह से वह कहने लग गई है कि हमारे नेताओं को सच तो बोलने दीजिए।अब आगे पढ़िए वे क्या लिखते है ।
                 मैंने पहले भी तवलीन  सिंह के बारे में लिखा है।  वरिष्ठ पत्रकार है , कट्टर सोनिया विरोधी और कुछ समय पहले तक मोदी समर्थक।  चेतन भगत, राजदीप सरदेसाई, शेखर गुप्ता , जैसे स्तम्भकारों के विचार परिस्थितियों को देख कर बदले है , तवलीन सिंह भी सरकार की असफलताओं पर लिखने लग गई। इस सप्ताह वे कह रही है हमारे नेताओं को सच तो बोलना चाहिए।  किसी ने कहा उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन और बिस्तर की कमी है , योगी  जी ने बयान जारी किया , कोई कमी नहीं है।  सारी  दुनिया के अखबार और सरकारें हमारे खिलाफ लिख रहे है , बोल रहे है।  विदेश सचिव कह रहे है हमें 40 देशों से मदद मिल रही है।  ये मदद क्यों आ रही है। क्योंकि वे जानते है सच क्या है।  क्योंकि हम परेशानी में है। हमसे परिस्थिति संभल नहीं रही  है।  पर दूसरी तरफ जब आस्ट्रेलिया के एक अखबार ने हमारे बारे में लिखा  तो राजदूतावास ने उसे चिट्ठी लिखी, वह झूंठ लिख रहा है। सरकार चाहती है कि विदेशी मदद  भी करे और माने भी कि यहाँ कोई समस्या नहीं है।  योगी जी ने एक पत्रकार को जेल भिजवा दिया कि वह यह कह रहा था कि ऑक्सीजन की कमी है। पत्रकारों का श्मशान  घाट  जाना बंद करवा दिया। तवलीन सिंह का लेख जनसत्ता में जरूर पढियेगा।
                       यू पी ही  नहीं , क्या सारे देश और हमारे प्रान्त मध्य प्रदेश का यही हाल नहीं है।  लोग मर रहे है , नेताओ और अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ा रहे है , एक बिस्तर, एक सिलिंडर , एक इंजेक्शन।  अस्पताल के बाहर अपने परिजनों की  गोद में  लोग दम  तोड़ रहे है।  10  से 20  लाशे , या और ज्यादा क्षेत्र के हिसाब से जल रही है. श्मशान  में लकडिया ख़तम हो गई , जलने के लिए भी वेटिंग लिस्ट है। एक एम्ब्युलेंस  में 20  लाशें।और हमारे   मुख्य मंत्री जी भी कह रहे है किसी चीज की कमी नहीं है।और  हमारे स्थानीय  नेता है कि रोज घोषणाएं कर रहे है।  मानो वे कह रहे है आज जो मर रहे है उन्हें छोडो कल तो तुम्हारा सुनहरा है।एक जिला अस्पताल में  150  ऑक्सीजन मशीने आएँगी तो दूसरे में 80 l  एक का भी आर्डर बताएँगे।  मंत्री जी कह रहे है नए कोविड  सेंटर  बन रहे है।  मै पूछना चाहता हूँ पुरानो  के क्या हाल है। दूसरे मंत्री जी तीन जगह 1 करोड़ से ज्यादा की लागत के तीन ऑक्सीजन प्लांट की घोषणा कर रहे है।  किस मद  से किये , बताएँगे। कब तक चालू होंगे ?  चुप हूँ  कोई कहेगा राजनीति करते हो।   फिर ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता बढ़ रही है।   फिर ट्रेने  आ रही ऑक्सीजन लेकर , फिर विदेशो से ऑक्सीजन आ रही है।  भाई साहब चिंता मत कीजिये सारी  दवाईयों का स्टॉक  है।  रेमेडिसीवर, चिंता की कोई बात नहीं।  और ऑक्सीजन प्लांट तो15  दिन में चालू  हो ही रहा है।  मै हिसाब लगा रहा हूँ  , 15  दिन में 300  से ज्यादा मर  नहीं जाएंगे। उनकी चिंता कौन करेगा ?  कोई जवाब है हमारे पास।
                  अब रतलाम और मंदसौर की लड़ाई ऐसी हो गई जैसे हिन्दुस्तान पाकिस्तान काश्मीर के लिए लड़ रहे है l कलेक्टरों को वही करना है जो वे कर रहे है।  अपने क्षेत्र के लोगों को बचाएं। फ़ैल तो सिस्टम हुआ है  जो ऑक्सीजन नहीं दे पा रहा।यह ऑक्सीजन नहीं मौत का बंटवारा है।  तय करलो कितने किसके यहाँ मरना है।
                   मनासा का तीन हज़ार जनसँख्या के गॉंव है अल्हेड़  , तीन दिन पहले तक एक सप्ताह में 44  मर गये  थे।  मीटर चालू  था।  लोग घर छोड़ खेत पर रहने चले गए है।  एक दिन एक अखबार के स्थानीय संस्करण में पढ़ा और फिर कैसा सन्नाटा । सुना कंजार्डा पठार की  भी यही हालत है और  यही रामपुरा कुकड़ेश्वर की ।  एक डम्पर टकराता है , 4 मरते है तो राष्ट्रीय खबर बनती है।44 मर गए ,आपने खबर सुनी ?   ठीक बात है।  नकारात्मक बातें नहीं होना चाहिए। , सकारात्मक करो।यही कोरोना से लड़ने का सही तरीका है।  पर इन मौतों को कैसे देखे।
                      नीमच  कलेक्टर साहब हाथ जोड़ कर निवेदन कर रहा हूँ , कम से कम मनासा के सारे  गाँव में दवाई तो छिड़कवा  दे।  आँगनवाड़ी , पंचायत , आशा कार्यकर्ता को कहे कि गंभीर मरीजों की पहचान करे।  अभी तो इतना भी नहीं हो रहा।  कुकड़ेश्वर में  सी एच सी के बराबर अस्पताल भवन में एक भी डॉक्टर नहीं।  रामपुरा में मात्र एक।  दूसरा स्टाफ है नहीं।  उस दिन सांसद जी कह गए थे आयुष के डॉक्टर लगा लो।  कितने लगे? कह रहे थे  नर्स तो बहुत उपलब्ध है , तो लगाइये ना।
श्री नाहटा ने स्थानीय मीडिया पर भी लिखा है । उन्होंने स्थानीय  मीडिया से एक निवेदन किया है कि। खूब घोषणाएं छापिए आठ कालम में ,पर इनके पूरा होने के तारीख तो पूछ लीजिये।इतना तो पूछ लीजिये क्या अनुमान है तब तक कितने और मर जाएंगे। कहिये कोविड  और गैर कोविड मौत से मरने वालों के आंकड़े प्रसारित कीजिये। मौतों के आंकड़े का  फर्क प्रशासन स्पष्ट  क्यों नहीं करता।    दोनों जिलों के मरने वालो के परिजन आपके आभारी रहेंगे।