हल्दी घाटी से शुरू हुई पराक्रम यात्रा आज मंदसौर पहुंचेंगी

7:14 pm or June 10, 2022
महावीर अग्रवाल
मन्दसौर १० जून ;अभी तक;  18 जून 1576 को हल्दीघाटी के युद्ध में मेवाड़ी वीरों के साथ ही चंबल घाटी के रणबांकुरे ग्वालियर के राजा राम शाह तोमर अपने 3 पुत्रो और एक 16 वर्षीय पौत्र के साथ शहीद हुए थे। एक दिन एक ही स्थान पर एक साथ तीन पीढ़ी का बलिदान राष्ट्र के लिए ऐसा गौरव मेवाड़ की माटी को ही प्राप्त है। महाराणा प्रताप की सेना में आदिवासी जनजाति और मेवाड़ के राजपूतों के साथ ही सभी हिंदू जातियों के अनेक प्रकार से प्रताप का सहयोग किया था। युद्ध जीतने के लिए तलवार चलाने वाले योद्धा के साथ ही अनेक प्रकार की आवश्यकता पूर्ति की जानी होती है वह सब पूर्ति मेवाड़ वासियों द्वारा की गई थी। इस युद्ध में हकीम खान का सहयोग, भामाशाह का योगदान, गोविंद सिंह पुरोहित की सक्रियता यह सिद्ध करती है हल्दीघाटी में सभी राष्ट्रवादी ताकत है जो प्रताप के साथ ही उनका बड़ा योगदान था। हल्दीघाटी के इन शहीदों को 10 जून के दिन पुष्पांजलि देकर रक्त ताल की पावन बलिदानी मिट्टी को समाधि के फूलों को एक ताम्र  कलश में रखकर वहां से रवाना होकर 10 जून रात्रि विश्राम चित्तौड़गढ़ करके, 11 जून प्रातः 8 बजे भोपाल राजपूत छात्रावास से एडवोकेट एवं पूर्व प्राचार्य गोपाल सिंह राठौड़ के नेतृत्व में रवाना होकर 11जून को सायंकाल 6 बजे श्री खाटूश्याम मंदिर मंदसौर पर पहुंचने की संभावना है।
                       साथी बंधुओं से निवेदन है कि देश एवम राष्ट्रीय स्वाभिमान राष्ट्रीय अस्मिता के लिए शहीद होने वाले इन वीरों के बलिदान को कलश पर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि देकर अपना दायित्व पूरा करे। इस यात्रा के प्रभारी अनिल सिंह राठौर सेवानिवृत उप पुलिस अधीक्षक है। यह जानकारी शैलेंद्र सिंह राठौर ने दी।