हाईकोर्ट प्रबंधन पर पांच हजार की कॉस्ट  पदोन्नति नही दिये जाने पर महिला कर्मचारी ने दायर की थी याचिका

सिद्धार्थ पांडेय

जबलपुर १९ नवंबर ;अभी तक;  हाईकोर्ट में कार्यरत महिला ने निर्धारित योग्यता के बावजूद भी पदोन्नति नही दिये जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस पुरूषेन्द्र कौरव की युगलपीठ ने दस प्रतिशत ब्याज सहित अन्य वेतन सहित अन्य लाभ देने निर्देश दिये है। युगलपीठ ने हाईकोर्ट प्रबंधन पर पांच हजार रूपये की कॉस्ट लगाते हुए उक्त राशि याचिकाकर्ता के बैंक खाते में जमा करने आदेश जारी किये है।

याचिकाकर्ता प्राची पांडे की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया कि वह हाईकोर्ट में स्टेनोग्राफर के रूप में पदस्थ थी। वरिष्ठ होने के बावजूद भी अक्टूबर 2018 को उसे कनिष्ठ महिला स्टेनोग्राफर पर पदोन्नति प्रदान कर दी गयी। जिसके बाद उसके अभ्यावेदन पेश किया था। अभ्यावेदन पर सुनवाई करते हुए डीपीसी ने जुलाई 2019 को पदोन्नति प्रदान कर दी परंतु नो वर्क नो पेमेंट के आधार पर वेतन वृध्दि से अन्य लाभ देने से इंकार कर दिया। जिसके खिलाफ उक्त याचिका दायर की गयी थी।

सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि अक्टूबर 2018 में आयोजित डीपीसी के समक्ष याचिकाकर्ता के स्टेनोग्राफर के रूप में प्रतिमिनट अंग्रेजी के सौ शब्द लिखने संबंधित योग्यात प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नही किया गया था। जिसके कारण उसे पदोन्नति से वंचित कर दिया गया था। उक्त योग्यता प्रमाण-पत्र याचिकाकर्ता के सर्विस रिकॉर्ड में उपस्थित था। याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर डीपीसी ने उसे पदोन्नति प्रदान की परंतु नो वर्क नो पेमेंट का सिध्दांत लागू करते हुए वेतन वृध्दि व अन्य लाभ से वंचित कर दिया।
युगलपीठ ने माना कि सर्वीस रिकॉर्ड में प्रमाण-पत्र होने के बावजूद भी उसे डीपीसी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किये जाने को गलती मानते हुए उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आर्दश हीरा तथा अधिवक्ता शांतनु अयाची ने पैरवी की।