हाई कोर्ट ने दुष्कर्म करने के प्रकरण में आरोपी को बरी किये जाने के खिलाफ राज्य शासन द्वारा की गई अपील स्वीकार की

2:19 pm or May 10, 2022

आनंद ताम्रकार

बालाघाट 10 मई ;अभी तक;  मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 10 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के प्रकरण में आरोपी को बरी किये जाने के खिलाफ राज्य शासन द्वारा की गई अपील स्वीकार कर ली।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है की ऐसे संवेदनशील प्रकरण में बालाघाट के विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट आनंदप्रिय राहुल ने अपने निर्णय में महत्वपूर्ण मेडिकल साक्ष्य डीएनए रिपोर्ट पर ना ही विचार किया और ना ही उसका उल्लेख किया।

जस्टिस सुजायापाल एवं जस्टिस डी डी बंसल खण्डपीठ ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित जज का मामला प्रशासनिक समिति को भेजने के निर्देश रजिस्टर जनरल को दिया है।

कोर्ट ने यह उल्लेख किया है की ताकी गलती करने वाले जज के खिलाफ उचित कार्यवाही या आदेश पारित किया जा सके। कोर्ट ने मामले के आरोपी जितेन्द्र कुठे उर्फ गोलू के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर उसे रजिस्टर के समक्ष हाजिर होने के निर्देश दिये है।

यह उल्लेखनीय है की बालाघाट के विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट आनदंप्रिय राहुल ने 22 सितबर 2021 को नाबालिक  से दुष्कर्म करने के आरोपी जितेन्द्र कुठे को साक्ष्य के अभाव में निर्दोष करार कर दिया था। जितेन्द्र पर आरोप लगाया गया था की उसने अपनी मुंहबोली भांजी के साथ ज्यादती की थी। जिला अदालत द्वारा दिये गये इस फैसले के विरुद्ध राज्य शासन ने हाईकोर्ट में अपील प्रस्तुत की।

शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता एस के कश्यप ने न्यायालय को बताया की मामले के मुख्य गवाह थानेदार के एल वरकडे ने अपने साक्ष्य में यह बताया था की आरोपी का डीएनए टेस्ट पॉजिटिव आया है उन्होने यह दलील भी दी की पीड़िता की उम्र 10 वर्ष की थी और पॉक्सो एक्ट में दिये प्रावधानों के अनुसार पीड़िता के बयान होने पर यह माना जाता है की अपराध कारित हुआ है और इसमें कोई भी सहायक साक्ष्यों की आवश्यकता नहीं होती।

अधिवक्ता कश्यप ने यह उल्लेख किया है की दुखद पहलू यह भी है की रिपोर्ट पेश होने के बावजूद संबंधित जज ने पूरे फैसले में डीएनए रिपोर्ट का हवाला ही नही दिया। इस लिये आरोपी को दोषमुक्त करने का निर्णय त्रुटिपूर्ण है।