हिंदी दिवस *मातृभाषा मां के दूध के समान होती है*

महावीर अग्रवाल

मन्दसौर  १४ सितम्बर ;अभी तक;  हिंदी दिवस पर शिक्षाविद श्री रमेशचंद्र चन्द्रे ने कहा कि मातृभाषा के माध्यम के मुकाबले और कोई माध्यम शक्तिशाली नहीं होता है *जैसे मां के दूध के मुकाबले शिशु के लिए और कोई दूध नहीं होता है वैसे ही शिक्षा के लिए मातृभाषा के अलावा और कोई भाषा नहीं हो सकती है*

उन्होंने कहा कि विद्यालयों में अंग्रेजी की अनिवार्यता के कारण हमारे देश के कई विद्यार्थी अपनी शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाते हैं और जो **जैसे तैसे अंग्रेजी से कुश्ती जीतने के बाद* डिग्री धारण कर लेते हैं उसमें से अधिकांश बेरोजगारी के शिकार हो जाते हैं
हमारे विद्यालयों से हिंदी माध्यम में निकले हुए विद्यार्थियों को यदि उचित सम्मान ,उचित रोजगार, उचित आमदनी के अवसर प्राप्त हो तो देश में अंग्रेजी भाषा के महत्व को कम करके हिंदी भाषा को सम्मानित किया जा सकता है

श्री चन्द्रे ने कहा कि अन्यथा, डॉ राम मनोहर लोहिया ने कहा था ,कि *मेरी समझ में वे लोग बेवकूफ है जो अंग्रेजी के चलते हुए समाजवाद कायम करना चाहते हैं ,* वह भी बेवकूफ है जो समझते हैं कि अंग्रेजी के रहते हुए लोकतंत्र को कोई खतरा नहीं है ये ही थोड़े से लोग इस अंग्रेजी के जादू द्वारा देश के करोड़ों लोगों को धोखा देते रहेंगे ।

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