हिंदू त्योहारों के लिए बाधक न बने सरकार-शिक्षाविद रमेशचन्द्र चन्द्रे,  धार्मिक आयोजनों को बिना शर्त अनुमति दी जाए

महावीर अग्रवाल
मन्दसौर ५ अक्टूबर ;अभी तक;  विगत ढाई वर्षाे से कोरोना के बचाव को लेकर जो भी नियम, कानून सरकार,  जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासन के द्वारा बनाए गए। वह सभी कानून एक अच्छे नागरिक की तरह लोगों ने पालन किए और सरकार की व्यवस्था में पूर्ण सहयोग प्रदान किया किंतु अब जब कि कोई कोरोनावायरस वायरस के प्रकरण सामने नहीं आ रहे हैं स्कूल कॉलेज खुल रहे हैं बाजारों में  भारी मात्रा में भीड़ है और प्रदेश में राजनीतिक कार्यक्रमों में भी भारी भीड़ जुट रही है चातुर्मास में विभिन्न धर्मों के बड़े-बड़े कार्यक्रम सम्पन्न हुए उस समय प्रशासन अपनी मौन रहा ?
             उक्त बात कहते हुए शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता रमेशचन्द्र चन्द्रे कहा कि इसके अतिरिक्त मुस्लिम समाज के कार्यक्रम के लिए प्रशासन ने मौन धारण कर कार्यक्रम होने दिए थे  किंतु जब हिंदू धर्म के त्योहारों का दौर चालू होता है तो शासन और प्रशासन पूरी तरह सतर्क और कठोर होने लगता है नए-नए नियमों के साथ उन्हें बांधने की कोशिश की जाती है जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं धार्मिक गतिविधियों का नेतृत्व करने वाले आयोजकों और कार्यकर्ताओं को समझाइश देकर के अनुशासन के पालन की बात की जाती है।
             नवरात्रि त्यौहार के अंतर्गत होने वाले गरबा कार्यक्रम की गाइड लाइन पर अपने विचार व्यक्त करते  हुए श्री चन्द्रे  ने कहा कि अभी नवरात्रि में गरबा मंडलों को लेकर जो गाइडलाइन प्रशासन के द्वारा जारी की जा रही है उससे हिंदू समाज की माताएं-बहने और धार्मिक आयोजन करने वाले लोगों की भावनाएं आहत होती दिखाई दे रही है और सम्पूर्ण समाज में एक निराशा का वातावरण पैदा हो रहा है इसलिए शासन- प्रशासन से आग्रह कि वह नगर एवं जिले में गरबा मंडलों को आयोजन करने की खुलकर तथा बिना किसी कठोर शर्त और नियम के उन्हें अनुमति प्रदान करें।
श्री चन्द्रे  ने यह भी कहा कि हिंदू समाज के अनुशासन को उसकी कमजोरी समझना भी उचित नहीं है उन्होंने जनप्रतिनिधियों, संत समाज और हिंदू संगठन सहित समस्त सामाजिक, धार्मिक नेतृत्व करने वाले लोगों से आग्रह किया प्रशासन की बात यदि हमेशा चुप रह कर स्वीकार की गई तो प्रशासन हिंदू समाज पर नए नए नियम लगता रहेगा इसलिए अपने अधिकार हेतु सभी लोगों को एकजुट होकर शासन- प्रशासन से गरबा आयोजन में पूरी छूट मांगने का प्रयास करना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध भी जाहिर करना चाहिए।