हितग्राही का फर्जी खाता खोल हडप ली  मुआवजे की राशि, 9 लोगों पर केस दर्ज;

मयंक शर्मा
खंडवा १७ जून ;अभी तक;  बुरहानपुर जिले के चैखंडिया में बोरबन तालाब योजना में हुए 42.11 लाख के भूमि अधिग्रहण राशि घोटाले में तत्कालीन एसडीएम समेत 9 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अफसरों व बैंक कर्मियों ने मिलकर हितग्राही के नाम का एक फर्जी खाता जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित खंडवा की शाखा तुकईथड में खुलवाया और 42 लाख रूपए की राशि निकाल ली। बुरहानपुर कलेक्टर से शिकायत के बाद जांच एसडीएम शैलेंद्रसिंह सोलंकी को सौंपी गई। उनके जांच प्रतिवेदन पर  नेपानगर पुलिस ने केस दर्ज कर बुधवार को 5 लोगों को राउंडअप किया है। यह जानकारी एसपी ललित लोढा ने दी। उन्होने कहा कि नेपानगर पुलिस ने सभी 9 लोगों पर धोखाधड़ी समेत शासकीय राशि का गबन व आपराधिक षडयंत्र की धाराओं केस दर्ज किया है।
                        एसपी ने बताया कि नेपानगर एसडीएम शैलेन्द्र सोलकी के जांच प्र्रतिवेदन जिसके आधार पर केस दर्ज किया है उनमें  नेपानगर के तत्कालीन एसडीएम विशा माधवानी समेत उनके लिपिक पंकज पाटे, तुकईथड शाखा प्रबंधक अशोक नागनपुरे, बैंककर्मी अनिल पाटीदार, होमगार्ड जवान सचिन वर्मा समेत इम्तियाज खान, संजय मावस्कर, फिराज खान को  दोषी पाया है। मामले का अधिक ख्ुालासा करते हुये प्रकरण केें व्हिसल ब्लोअर व पत्रकार डा. आनंद दीक्षित ने बताया कि वर्ष 2018-19 में नेपानगर क्षेत्र में बोरबन तालाब निर्माण में 15 करोड रूपए खर्च किए गए थे। जिसमें आधी राशि निर्माण और आधी राशि मुआवजे पर खर्च की गई। इसमें रामेश्वर कल्लू की 15 एकड़ जमीन डूब में शामिल थी, जिसे मुआवजे की राशि न देकर बाले बाले आरोपित शख्स बंदरबांट कर गये। श्री दीक्षित ने बताया कि घोटाला के लिये बैंककर्मियों से एक दलाल ने अव्वल बात की।  10 लाख रुपए की मांग के एवज में सौदा 5 लाख रुपए में तय होना बताया गया। सहकारी समिति आपरेटर ने 89 हजार रुपए लिए। होमगार्ड जवान ने पहले 50 हजार और बाद में 90 हजार रुपए निकाले। एक बार में करीब 16 लाख रुपए का लेन-देन  हुआ। कियोस्क संचालक ने 90 हजार रुपए निकाले। धारणी के एक व्यापारी को एक लाख रुपए का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से किया जाना दर्शाया गया। इसी तरह अन्य लोगों के बीच भी बंदरबांट कर 42.11 लाख रुपए का फर्जीवाड़ा किया गया। यह रकम दो बार दो खातों से कम ज्यादा कर एक-दूसरे को बांटी गई।
                       उन्होने कहा कि योजना के मुआवजे की पहली किस्त के लिये 25 जुलाई को आई रकम के लिये फर्जी खाता खोलकर चंदू मांगू के नाम पर 17.71 लाख रुपए पर बंदरबांट की शुरूआत की।  इसमें होमगार्ड जवान, बैंककर्मी, नेता, आधार कार्ड बनाने वाला कियोस्क संचालक, नोटरी और सहकारी समिति आपरेटर का नाम सामने आये है। दूसरा फर्जी खाता कलावती कल्लू के नाम से तुकईथड़ के सहकारी बैंक में खोला गया। दोनों को 24 जून को पासबुक इश्यू की गई। कलावती के खाते में 15 अगस्त के आसपास 24.40 लाख रुपए आए। इसमें से भी अधिकारियों से लेकर गार्ड, ड्राइवर, बैंककर्मी और दलालों ने पैसा लूटा।