07 अगस्त – विश्व मित्रता दिवस पर विशेष; मेरी सारी सम्पत्ति ले लो बदले में एक अच्छा और सच्चा मित्र दे दों

6:12 pm or August 5, 2022
डॉ. बी.आर. नलवाया
प्राध्यापक – वाणिज्य
राजीव गांधी शा.स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मन्दसौर
मन्दसौर ५ अगस्त ;अभी तक;  दोस्तों – दोस्ती नसीब से बनती है, जिंदगी में एक अच्छा और सच्चा दोस्त मिलना ईश्वरीय देन है। यदि हमें एक अच्छा और सच्चा दोस्त मिल जाता है तो जिन्दगी में इससे बढ़कर खुशी और आनंद के क्षण ढुंढने की कोई आवश्यकता नहीं होती। क्योंकि आज व्यस्तता के जीवन में तथा स्वार्थ-लोलुपता के कारण दोस्ती वर्तमान में एक स्वार्थ बनकर रह गई। इसलियें आप मित्र का चुनाव बहुत सावधानी से करें और उसे बनाये रखें। अतः अधिक मित्रों को बटोरने में अपना समय नष्ट ना करें। एक ही मित्र ऐसा बनायें जो आपको जीवन की अंधेरी रात में भी साथ दें। जो मित्र जीवन की अंधेरी रात में अपनी प्रतिभा और प्रेम से आनंदित और प्रकाशमान करता हो वह एक ही मित्र पर्याप्त होता है। यदि हमारा मित्र ‘‘मिठी मिठी बाते करें और कभी कड़वा न कहें तो यह मान लिजियें की वह आपका सच्चा मित्र नहीं है। आप धोखे में रहेंगे यह नहीं भूले की वह मित्र के वेश में आपका गर्भित शत्रु भी है।’’ मित्र नहीं बनाने की एक दुःखद दास्तान प्रस्तुत है –
                        अमेरिका के एक पत्रकार ने हेनरी फार्ड से उनके अंतिम दिनों में एक प्रश्न पूछा। हेनरी फोर्ड अमेरिका की बहुत बड़ी फोर्ड कंपनी के मालिक थे। बड़े धनपतियों में उनकी गिनती होती थी। पत्रकार ने कहा आपको जीवन के सभी सुख प्राप्त है। आपके पास विपुल सम्पत्ति है, आपको जीवन में सजीव सम्पत्ति की ख्याति भी काफी मिली है। आपने अपने जीवन में बड़े-बड़े गौरवपूर्ण कार्य भी किए है। इन सभी सफलताओं के बीच कोई ऐसी कमी भी है, जो आपके मन को खटका करती है ? हेनरी फोर्ड ने कहा मुझे सम्पत्ति और सूयश सब कुछ मिला पर एक बहुत बड़ी चीज मैं नहीं पा सका। संसार की सर्वाधिक कीमती वस्तु है – ‘मित्र’ जिसे हीरे भी नहीं तौल सकते। मेरे धन के नशे ने मुझे लोगों के दिल से मिलने नहीं दिया। जब-जब मैंने मिलने की कोशिश की धन का अहंकार दीवार बन कर हमारे बीच खड़ा हो गया। उस समय तो नहीं पर आज मेरा हृदय भी उस कमी को महसूस कर रहा है कि जीवन में मित्र का अभाव कितना बड़ा अभाव होता है। आज अपनी सारी सम्पत्ति देकर भी मित्र पाने के लिए मेरी आत्मा अनुकूल है। वास्तव में ‘मित्र’ जीवन का सच्चा साथी है। यदि इस जीवन के इतिहास में फिर से निर्माण करने का मुझे प्रकृति की ओर से सुअवसर मिले तो मैं मित्र की खोज करूंगा और यही कहानी अमेरिका का विश्वविख्यात धन कुबेर कारेनगी बोलता है – मेरी सारी सम्पत्ति मुझ से ले लो और उसके बदल में मुझे केवल एक अच्छा, सच्चा मित्र दे दो।’
                       हमारे पूराने ग्रंथ में दोस्ती का रंग यदि देखने को मिलता है तो वह कृष्ण-सुदामा की दोस्ती का है। जहां जमीन-आसमान का अंतर होने के बावजूद सालों बाद बचपन के दोस्त ऐसे मिलें जैसे समय ही थम गया हो। अब इस कलियुग में दोस्त नसीब से ही मिलते है। सच्चा दोस्त एक कल्पना और आदर्श बनकर ही रह गये है। दोस्ती बचपन से बुढ़ापे तक साथ चलती है तो कभी कालेज या दफ्तर से बनी दोस्ती हरदम खास होती है। इस वर्ल्ड फ्रेंडशिप डे पर कुछ ऐसी हिदायतें जो दोस्ती को अधिक मजबूत बनाये रख सकती है –
                   दोस्ती हमेशा बराबरी वालों तथा समान विचारधारा व्यक्तियांे से करनी चाहियें। जो किसी भी परिस्थिति में नीचा दिखाने की कोशिश ना करें। अगर वह गरीब है तो अपनी अमीरी का दिखावा ना करें।
                       अपने दोस्तों के आगे उसके घरवालों या रिश्तेदारों की बुराई ना करें। क्योंकि दोस्ती में छिन्द्रान्वेषण की प्रवृत्ति अच्छी नहीं होती है। यदि आपका दोस्त पढ़ाई या किसी नौकरी में आपसे अधिक तरक्की पर हो तो उसे ईष्या की नजर से नहीं देखे और ना ही उसके प्रति आलोचना करें। यदि कोई बात आलोचना सम्बंधी हो तो ऐसे ढंग से प्रस्तुत करें जिससे मित्र के दिल पर ठेस न पहुंचे। अपने दोस्तों के जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ एवं उसकी खास उपलब्धि पर शुभकानाऐं और बधाई देना न भूलें। यदि मोबाईल से बधाई देते तो अच्छा है और यदि प्रत्यक्ष मिलकर बधाई देते है तो अति उत्तम होता है। इसके साथ कोई तोहफा देना चाहते है तो वह भी अच्छा है। मित्र अच्छा चरित्रवान, उत्तम व्यवहार, अच्छे आचरण वाला, ज्ञानवान हो उसी से दोस्ती अच्छी बनाना चाहिए।
                     दोस्ती में यदि दृढ़ मित्रता चाहते हो तो मित्र से बहस करना, उधार लेना-देना और उसकी पत्नी से अकेले में व अधिक बातचीत करना वर्जित है। क्योंकि यह दोस्ती कभी-भी दुश्मनी में बदल सकती है।
                  दोस्ती में दोस्त से मिलने पर सम्मान करों, पीठ पीछे उसकी प्रशंसा करों तथा आवश्यकता पड़ने पर उसकी मदद करों। दोस्त के घर छोटे-बड़ो से भी दोस्त जैसा व्यवहार करों, उनके प्रति स्नेह, प्यार और समर्पण की भावना रखो।
दोस्तों से जब भी मिलें वैसे ही अनौपचारिकता से मिले जैसे हमेशा मिलते रहे। यदि आप दोस्त से मिलते ही अपना हाथ बढ़ा लेते है तो वह भी गले लगने में कोई संकोच नहीं करेगा।
दोस्त से खुश मिजाज में बाते करें, इसलियें की वह अपनी परेशानी का दुखड़ा साझा करें तो तसल्ली से उसके हालात सुनकर समझने के बाद उचित सलाह देंवे।
दोस्तों को सोश्यल मीडिया के जरियें आप अपनी बातचीत उचित तरीकें से करें और कोई ऐसी पोस्ट ना करें जिससे उसका मन दुखे तथा परिवार वालों को आपकी हल्की मानसिकता का पता ना चलें।
एक सच्चा दोस्त जीवन की बहुत बड़ी पूंजी होती है जो सम्मान भी दिला सकती है और अपमान के कड़वे घूंट पीने को भी मजबुर कर सकती है। इसलियें दोस्ती की कोई सीमा नहीं होती। किन्तु आज अपनी सुविधानुसार एक सीमा तय करके दोस्ती बनाना चाहियें। यह स्पष्ट है कि दोस्त बना लेना तो आसान है परन्तु दोस्ती निभाना कठिन होता है। क्योंकि कई बार अच्छी दोस्ती में गलतफहमी उत्पन्न हो जाती है तो उसे दूर करने के प्रयास भी करना चाहियें। दोस्ती में हमेशा अपेक्षा नहीं रखे बल्कि अपनी ओर से त्याग के लियें तैयार रहना भी सीखें। याद रखें दोस्ती का हाथ हमेशा साथ।