10 वीं, 12 वीं का रिजल्ट खराब, 8 वीं तक लगेगी उपचारात्मक कक्षाएं

1:40 pm or May 31, 2022

मयंक भार्गव

बैतूल ३१ मई ;अभी तक;  मर्ज कुछ और दवा किसी और की यह फार्मूला इन दिनों शिक्षा विभाग में दिखाई दे रहा है जब विभाग द्वारा हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल परीक्षा में खराब रिजल्ट के लिए स्कूल प्रबंधन नहीं बल्कि स्कूल से संबंधित पोषक शालाएं जिम्मेदार है। पोषक शालाओं से पांचवी और आठवीं उत्तीर्ण करके आने वाले अधिकतर बच्चे पढ़ाई में कमजोर रहते है इसी के कारण दसवीं और बारहवीं का रिजल्ट खराब होता है।

हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्राचार्यो के इसी अभिमत के कारण प्रायमरी और मिडिल स्कूल में उपचारात्मक कक्षाएं लगाने का निर्णय ले लिया। इसके फलस्वरूप कल से जिले के 449 प्राथमिक और 230 माध्यमिक स्कूलों में उपचारात्मक कक्षाएं प्रारंभ होगी। दो साल कोविड काल के दौरान स्कूलों का संचालन प्रभावित होने के बाद इस साल हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल परीक्षा में रिजल्ट बहुत खराब आया। कुछ स्कूलों का रिजल्ट तो 20 फीसदी से भी कम रहा। 10 वीं और 12 वीं में खराब रिजल्ट को लेकर विभाग द्वारा प्राचार्यो की समीक्षा बैठक ली गई।

सूत्रों के अनुसार इस बैठक में अधिकतर प्राचार्यो ने उनके स्कूल का रिजल्ट खराब आने का पूरा दोष संबंधित पोषक शालाओं पर मढ़ दिया। प्राचार्यो का कहना था कि पोषक शालाओं से आठवीं पास कर कई ऐसे बच्चे भी आ जाते है जिन्हें नाम तक लिखना नहीं आता है। ऐसे बच्चों के कारण ही दसवी और बारहवीं कक्षा का रिजल्ट खराब होता है। समीक्षा बैठक में प्राचार्यो की इस सफाई को मान लिया गया और इसी के परिणाम स्वरूप जिले की 449 प्राथमिक शालाओं और 230 माध्यमिक शालाओं में एक जून से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान उपचारात्मक कक्षाएं लगाने का आदेश जारी कर दिया गया।

एक जून से प्रतिदिन सुबह 8 से 12 बजे तक उपचारात्मक कक्षाएं लगाई जाएगी। इन कक्षाओं में बुनियादी शिक्षण, संख्या जान, विषय की कठिन अवधारणाओं पर विशेष ध्यान केंन्द्रित करते हुए विद्यार्थियों की शत प्रतिशत उपस्थिति के आदेश दिए गए है। पिछले वर्षो की तुलना में कम रिजल्ट आने वाले जिले के 87 हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों से संबंधि 449 प्राथमिक स्कूलों और 230 माध्यमिक स्कूलों में उपचारात्मक कक्षाएं लगाई जाएगी। इससे परिणाम चाहे जो हो लेकिन हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल में कम रिजल्ट आने से ग्रीष्मकालीन अवकाश में प्रायमरी और माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों का स्कूल लगाने से प्रायमरी और माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों में आक्रोश है।