11 साल की बेटी बनी पुलिसकर्मी

मयंक शर्मा
खंडवा ८ जनवरी ;अभी तक;  एक्सीडेंट में आरक्षक पिता की मौत हो गई थी और कोरोना ने मां को
छीन लिया था। 11 साल की यागनी अब पुलिस में भर्ती हो गई है। यागिनीको
पहले ही दिन आफिसर की कुर्सी पर बैठा दिया गया, उसका स्वागत किया गया। जब
उसने कामकाज संभाला तो रक्षित निरीक्षक ने उसे कामकाज समझाया। यागिनी
बोली- मेरे पापा भी ऐसे ही काम करते थे क्या। यह नजारा खंडवा में जिसने
भी देखा वो भावविभोर हो गया।
रक्षित निरीक्षक पुरुषोत्तम विश्नोई ने बताया कि बाल आरक्षक यागिनी के
आने पर बहुत खुशी हुई है। एक पल के लिए लगा कि वह उसके लिए क्या करें,
जिससे उसे खुशी मिले। वह अपनी चेयर से उठे और अधिकारियों की तरह सम्मान
देते हुए उस पर यागिनी को बैठाया। यागिनी को पुलिस के बारे में बताया और
समझाया कि वह अच्छे से पढ़ाई कर बड़ी अधिकारी बने। आफीसर चेयर पर बैठने
के बाद यागिनी बहुत खुश नजर आ रही थी।
पुलिस सेवा के दौरान पांच साल पहले पिता ने दम तोड़ दिया था। तब यागनी
मात्र 6 साल की थी। उसकी मां टीचर थी। मां ने बेटी को संभाला, लेकिन
कोरोना ने मां को भी छीन लिया। इसेक बाद मासूम यागनी को ननहाल में आसरा
मिला। पिता पुलिस सेवा में थे इसलिए परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा
नियुक्ति मिलनी थी। नियमतः यागनी को अनुकंपा नियुक्ति मिल गई। यागिनी के
मामा रक्षित निरीक्षक के पास लेकर पहुंचे थे। बाल आरक्षक के तौर पर आमद
देते हुए यागनी को पहले ही दिन आफिसर की कुर्सी पर बैठा दिया गया, उसका
स्वागत किया गया।
हरसूद में ननिहाल
यागिनी चौहान ने बाल आरक्षक के रूप में पुलिस विभाग में ज्वाइनिंग दी,
ताकी उसकी पढ़ाई और लालन-पालन अच्छे से हो सके। यागिनी के साथ हरसूद से
आए उसके मामा ने बताया कि जब तक वह बालिग नहीं हो जाती वे अपने ननिहाल
में रहेगी और जैसे ही वह बालिग हो जाएगी, नियमित ट्रेनिंग कर आरक्षक के
रूप में सेवा देगी।