21 जून को दोपहर 12 बजे कर्क रेखा पर गायब हुई लोगों की परछाई, युवाओं ने ली सेल्फी

9:29 pm or June 21, 2021
दीपक कांकर
रायसेन 21 जून ;अभी तक; हम बचपन से यह कहावत सुनते चले आ रहे है कि कोई साथ हो न हो, आदमी का साया हमेशा उसके साथ रहता है। लेकिन 21 जून को कर्क रेखा क्षेत्र में आदमी का साया भी उसका साथ छोड़ देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कर्क रेखा स्थल पर 21 जून को दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणे 90 डिग्री लम्बवत पड़ने के कारण खड़े व्यक्ति की परछाईं ही नहीं बनती। इसलिए कर्क रेखा क्षेत्र को नो शैडो जोन भी कहा जाता है। जिस कर्क रेखा को हमने बचपन से भूगोल में पढ़ा है और ग्लोब पर जिसे देखा है, उस स्थान पर ठहरना अपने आप में एक सुखद अनुभूति है। कर्क रेखा भोपाल से 25 किलोमीटर दूर उत्तर से निकलती है। जहां से यह गुजरती है वह स्थान भोपाल विदिशा स्टेट हाईवे-18 पर जिले के दीवानगंज और सलामतपुर के मध्य स्थित है। कर्क रेखा को चिन्हांकित करने के लिये उस स्थल पर राजस्थानी पत्थरों से चबूतरानुमा स्मारक बनाया गया है। यह स्थान रायसेन जिले का सबसे आर्कषक सेल्फी पाइंट है। यहां से निकलने वाला प्रत्येक व्यक्ति सेल्फी लिये बिना आगे नहीं बढ़ता। इस साल कोरोना के कारण आज के दिन भीड़ कम देखने को मिली। हर साल 21 जून को जहां लोग अपनी परछाई जाते हुए देखने आते हैं। सोमवार 21 जून को दोपहर 12 बजे कुछ पर्यटक यहां पहुंचे और उन्होंने देखा कि वास्तव में ही उनकी परछाई कुछ समय के लिए गायब हो गई।
पर्यटक पीयूष साहू
हमने सुना था कि 21 जून को दोपहर 12 बजे कर्क रेखा स्थल पर अपनी परछाई गायब हो जाती है। इसलिए हम यहां पर आए थे। और वास्तव में ही दोपहर 2 बजे कुछ समय के लिए मेरी परछाई गायब हो गई।
कैलाश गोस्वामी, पर्यटक का कहना था कि कर्क रेखा स्थल पर हर वर्ष 21 जून को बड़ी संख्या में पर्यटक अपनी परछाई को गायब होते हुए देखने भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर आदि शहरों से आते हैं। लेकिन पिछले 2 वर्षों से कोरोना के कारण यहां कम लोग आ रहे हैं।