शासकीय गृह विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पांच दिवसीय औषधीय पौधों में रोजगार की संभावना विषय पर प्रशिक्षण का आयोजन

7:11 pm or September 25, 2021
होशंगाबाद। शासकीय गृह विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय में दिनांक 20 सितंबर 21 से पांच दिवसीय औषधीय पौधों में रोजगार की संभावना विषय पर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। उच्च शिक्षा विभाग ,मध्यप्रदेश शासन एवं स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजना के तत्वाधान में संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. उमेश सिंह निदेशक स्वामी विवेकानंद कैरियर योजना उच्च शिक्षा विभाग भोपाल,विशिष्ट अतिथि डॉ महेंद्र मेहरा संभागीय नोडल अधिकारी भोपाल ,मुख्य वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ डॉ. आर. एस. एस. अहिरवार ,विषय विशेषज्ञ डॉ. आलोक मिश्रा जिला नोडल अधिकारी होशंगाबाद ,संयोजक डॉ संगीता अहिरवार एवं अध्यक्ष के रूप में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ श्रीमती कामिनी जैन ने अपनी गरिमा में उपस्थिति प्रदान की। औषधीय पौधों में रोजगार की संभावना विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजन एवं दीप प्रज्वलन के पश्चात कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम मे अपना उद्बोधन देते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ श्रीमती कामिनी जैन ने कहा कि हम उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव जी के आभारी हैं जिन्होंने इस प्रकार के संभाग स्तरीय कार्यक्रम को आयोजित करने का मार्गदर्शन दिया। इस प्रशिक्षण से लाभान्वित होकर विद्यार्थी औषधि पौधों के क्षेत्र में स्वरोजगार तलाशने का प्रयास करेंगे ।कोरोना काल में हमारा औषधि ज्ञान अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ है। भारत में कुछ वर्षों में औषधि फसलों की तरफ किसानों का अत्यंत रुझान बढ़ा है , औषधि फसलों की खेती से किसानों को अपेक्षाकृत अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होता है । औषधि पौधे लगाने पर सरकार द्वारा 30 से 75ः तक सब्सिडी प्रदान की जाती है ,एवं तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण भी दिया जाता है ।वर्तमान समय किसानों एवं युवाओं के लिए औषधि पौधों की खेती अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ होती है ,क्योंकि इन फसलों में कम खाद, पानी और कम देखभाल की आवश्यकता होती है ।इस प्रशिक्षण का विषय अत्यंत समयानुकूल है ,क्योंकि हर्बल उत्पादों की तरफ किसानों एवं युवाओं का रुझान बढ़ा है। महाविद्यालय में नर्सरी एवं सीड लाइब्रेरी उपलब्ध है।महाविद्यालय द्वारा इस क्षेत्र में विद्यार्थियों को स्वरोजगार हेतु प्रेरित किया जाता है । पंच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट अधिकारी एवं संयोजक डॉ संगीता अहिरवार ने विषय प्रवर्तन के साथ-साथ 5 दिवस के कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि स्वामी विवेकानंद योजना के अंतर्गत विगत कई वर्षों से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं विशेषज्ञों द्वारा औषधि पौधों का परिचय, उपयोग औषधि पौधों की उत्पादन तकनीक औषधि पौधों की देखभाल एवं रखरखाव ,नर्सरी का निर्माण एवं बीज बैंक का निर्माण शीर्षक पर विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है । औषधि पौधों का परिचय, उपयोग विषय पर मुख्य वक्ता डॉ उमेश सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारे प्राचीन धर्म ग्रंथ रामायण में भी औषधि संजीवनी वटी का वर्णन है। प्राचीन काल से ही हमारे पास औषधि एवं आयुर्वेद ज्ञान का भंडार है। वर्तमान में हम अपने प्राचीन आयुर्वेदिक एवं औषधि ज्ञान की पुनरावृत्ति कर लाभान्वित हो रहे हैं। विषय विशेषज्ञ डॉ. आर. एस .एस. सिकरवार ने अपने औषधि पौधों की जानकारी को साझा करते हुए कहा कि जंगल में निवास करने वाली जनजाति औषधि पौधों की बड़ी जानकार है। डॉ. सिकरवार ने अशोक, पीला पलाश, जटामांसी गिलोय, नागफली ,अश्वगंधा, सहजन नीम, अदरक ,पुदीना इत्यादि के औषधीय गुण पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। औषधि पौधों की उत्पादन तकनीक विषय पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस. के .तिवारी ने प्रकृति प्रदत्त 12 औषधि पौधे जो मानव स्वास्थ्य हेतु अत्यंत लाभकारी हैं । डॉ. तिवारी ने बताया कि एलोवेरा, गूगल, कालमेघ, स्टीविया, तुलसी ,सर्पगंधा, मेथा, पिपली, सतावर ,सफेद मूसली ,खस, काली हल्दी ,नींबू का उत्पादन तकनीक से किस प्रकार अधिकाधिक लाभ एवं रोजगार प्राप्त किया जा सकता है। औषधि पौधों की देखभाल एवं रखरखाव विषय पर कृषि वैज्ञानिक डॉ संध्या मुरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि देसी गुलाब, गुड़हल ,तुलसी, बावची, अकर्करा, मरुआ, गिलोय सतावरी ,अरंडी , हरसिंगार, कलिहारी मडूकपणी, कड़ी पत्ता ,एलोवेरा आदि पौधों की देखभाल एवं रखरखाव किस प्रकार वर्तमान समय में रोजगार का एक सशक्त साधन हो सकता है। नर्सरी निर्माण विषय एवं बीज बैंक के निर्माण विषय पर अपना उद्बोधन देते हुए श्रीमती विनीता शर्मा ने नर्सरी निर्माण से पौधों के विकसित होने तक की विस्तृत जानकारी विद्यार्थियों से साझा की। उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि नवजात पौधे की देखभाल ,कीड़ो से सुरक्षा, छिड़काव, रोपाई से लेकर विकसित नर्सरी तक की संपूर्ण प्रक्रिया से विद्यार्थियों को अवगत कराया। बीज बैंक का निर्माण प्रक्रिया को विस्तृत रूप से विद्यार्थियों को समझाया। औषधी विशेषज्ञ श्री जय प्रकाश दायमा ने भी अपने अनुभवों को इस प्रशिक्षण में साझा किया ।महाविद्यालय में औषधी उद्यान विगत कई वर्षों से अपने विभिन्न औषधीय पौधों की विभिन्नता के कारण विद्यार्थियों के जिज्ञासा का केंद्र बना रहता है। श्री दायमा द्वारा उद्यान की औषधी के उत्पादन के सहयोग से हर्बल शैंपू ,उबटन, हर्बल मेहंदी, चूर्ण, वैक्स सामग्री, हर्बल काढा जैसी औषधीय गुणवत्ता से परिपूर्ण सामग्री का निर्माण किया जाता है। महाविद्यालय द्वारा भविष्य में इन उत्पादनो की इकाई को वृहद रूप में स्थापित कर छात्राओं को स्वरोजगार से जोड़े जाने की योजना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए डॉ. श्रुति गोखले ने पांच दिवसीय प्रशिक्षण के विषय महत्व एवं लाभ से विद्यार्थियों को अवगत कराया। आभार डॉ कंचन ठाकुर ने किया। डॉ मनीष चन्द्र चौधरी ने महाविद्यालय में संचालित औषधी उद्यान एवं वनस्पति विभाग की वृहद संपदा की जानकारी दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ संध्या राय, डॉ. रामबाबू मेहर, डॉ निशा रिछारिया डॉ आभा वाधवा, डाँ.मनीषा तिवारी ,डॉ रीना मालवीय ,डाँ.कीर्ति दीक्षित डॉ. नीतू पवार, श्रीमती अंकिता तिवारी देवेंद्र सैनी, शैलेंद्र तिवारी ने अपना सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
सौरभ तिवारी
होशंगाबाद 25 सितम्बर ;abhitak ;  शासकीय गृह विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय में दिनांक 20 सितंबर 21 से पांच दिवसीय औषधीय पौधों में रोजगार की संभावना विषय पर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। उच्च शिक्षा विभाग ,मध्यप्रदेश शासन एवं स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजना के तत्वाधान में संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. उमेश सिंह निदेशक स्वामी विवेकानंद कैरियर योजना उच्च शिक्षा विभाग भोपाल,विशिष्ट अतिथि डॉ महेंद्र मेहरा संभागीय नोडल अधिकारी भोपाल ,मुख्य वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ डॉ. आर. एस. एस. अहिरवार ,विषय विशेषज्ञ डॉ. आलोक मिश्रा जिला नोडल अधिकारी होशंगाबाद ,संयोजक डॉ संगीता अहिरवार एवं अध्यक्ष के रूप में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ श्रीमती कामिनी जैन ने अपनी गरिमा में उपस्थिति प्रदान की।
                   औषधीय पौधों में रोजगार की संभावना विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजन एवं दीप प्रज्वलन के पश्चात कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम  मे अपना उद्बोधन देते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ श्रीमती कामिनी जैन ने कहा कि हम उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव जी के आभारी हैं जिन्होंने इस प्रकार के संभाग स्तरीय कार्यक्रम को आयोजित करने का मार्गदर्शन दिया। इस प्रशिक्षण से  लाभान्वित होकर विद्यार्थी औषधि पौधों के क्षेत्र में स्वरोजगार तलाशने का प्रयास करेंगे ।कोरोना काल में हमारा औषधि ज्ञान अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ है। भारत में कुछ वर्षों में औषधि फसलों की तरफ किसानों का अत्यंत रुझान बढ़ा है , औषधि फसलों की खेती से किसानों को अपेक्षाकृत अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होता है । औषधि  पौधे लगाने पर सरकार द्वारा 30 से 75ः तक सब्सिडी प्रदान की जाती है ,एवं तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण भी दिया जाता है ।वर्तमान समय  किसानों एवं  युवाओं के लिए औषधि पौधों की खेती अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ होती है ,क्योंकि इन फसलों में कम खाद, पानी और कम देखभाल की आवश्यकता होती है ।इस प्रशिक्षण का विषय अत्यंत समयानुकूल है ,क्योंकि हर्बल उत्पादों की तरफ किसानों एवं युवाओं का रुझान बढ़ा है। महाविद्यालय में नर्सरी एवं सीड लाइब्रेरी उपलब्ध है।महाविद्यालय द्वारा इस क्षेत्र में विद्यार्थियों को स्वरोजगार हेतु प्रेरित किया जाता है ।
                   पंच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट अधिकारी एवं संयोजक डॉ संगीता अहिरवार ने विषय प्रवर्तन के साथ-साथ 5 दिवस के कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि स्वामी विवेकानंद योजना के अंतर्गत विगत कई वर्षों से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं विशेषज्ञों द्वारा औषधि पौधों का परिचय, उपयोग औषधि पौधों की उत्पादन तकनीक औषधि पौधों की देखभाल एवं रखरखाव ,नर्सरी का निर्माण एवं बीज बैंक का निर्माण शीर्षक पर विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है ।
                 औषधि पौधों का परिचय, उपयोग विषय पर मुख्य वक्ता डॉ उमेश सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारे प्राचीन धर्म ग्रंथ रामायण में भी  औषधि संजीवनी वटी का वर्णन है। प्राचीन काल से ही हमारे पास औषधि एवं आयुर्वेद ज्ञान का भंडार है। वर्तमान में हम अपने प्राचीन आयुर्वेदिक एवं औषधि ज्ञान की पुनरावृत्ति  कर लाभान्वित हो रहे हैं।
               विषय विशेषज्ञ डॉ. आर. एस .एस. सिकरवार ने अपने  औषधि पौधों की जानकारी को साझा करते हुए कहा कि जंगल में निवास करने वाली जनजाति औषधि पौधों की बड़ी जानकार है। डॉ. सिकरवार ने अशोक, पीला पलाश, जटामांसी गिलोय, नागफली ,अश्वगंधा, सहजन नीम, अदरक ,पुदीना इत्यादि के औषधीय गुण पर विद्यार्थियों  का मार्गदर्शन किया। औषधि पौधों की उत्पादन तकनीक विषय पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस. के .तिवारी ने प्रकृति प्रदत्त 12 औषधि पौधे जो मानव स्वास्थ्य हेतु अत्यंत लाभकारी हैं । डॉ. तिवारी ने बताया कि एलोवेरा, गूगल, कालमेघ, स्टीविया, तुलसी ,सर्पगंधा, मेथा, पिपली, सतावर ,सफेद मूसली ,खस, काली हल्दी ,नींबू का उत्पादन तकनीक से किस प्रकार अधिकाधिक लाभ एवं रोजगार प्राप्त किया जा सकता है।
      औषधि पौधों की देखभाल एवं रखरखाव विषय पर कृषि वैज्ञानिक डॉ संध्या मुरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि देसी गुलाब, गुड़हल ,तुलसी, बावची, अकर्करा, मरुआ, गिलोय सतावरी ,अरंडी , हरसिंगार, कलिहारी मडूकपणी, कड़ी पत्ता ,एलोवेरा आदि पौधों की देखभाल एवं रखरखाव किस प्रकार वर्तमान समय में रोजगार का एक सशक्त साधन हो सकता है।
       नर्सरी निर्माण विषय  एवं बीज बैंक के निर्माण विषय पर अपना उद्बोधन देते हुए श्रीमती विनीता शर्मा ने  नर्सरी निर्माण से पौधों के विकसित होने तक की विस्तृत जानकारी विद्यार्थियों से साझा की। उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि नवजात पौधे की देखभाल ,कीड़ो से सुरक्षा, छिड़काव, रोपाई से लेकर विकसित नर्सरी तक की संपूर्ण प्रक्रिया से विद्यार्थियों को अवगत कराया। बीज बैंक का निर्माण  प्रक्रिया को विस्तृत रूप से विद्यार्थियों को समझाया। औषधी विशेषज्ञ श्री जय प्रकाश दायमा ने भी अपने अनुभवों को इस प्रशिक्षण में साझा किया ।महाविद्यालय में औषधी उद्यान विगत कई वर्षों से अपने विभिन्न औषधीय पौधों की विभिन्नता के कारण विद्यार्थियों के जिज्ञासा का केंद्र बना रहता है। श्री दायमा द्वारा उद्यान की औषधी के उत्पादन के सहयोग से हर्बल शैंपू ,उबटन, हर्बल मेहंदी, चूर्ण, वैक्स सामग्री,  हर्बल काढा जैसी औषधीय गुणवत्ता से परिपूर्ण सामग्री का निर्माण किया जाता है। महाविद्यालय द्वारा भविष्य में इन  उत्पादनो की इकाई को वृहद रूप में स्थापित कर छात्राओं को स्वरोजगार से जोड़े जाने की योजना है।
       प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए डॉ. श्रुति गोखले ने पांच दिवसीय प्रशिक्षण के विषय महत्व एवं लाभ से विद्यार्थियों को अवगत कराया। आभार डॉ कंचन ठाकुर ने किया। डॉ मनीष चन्द्र चौधरी ने महाविद्यालय में संचालित औषधी उद्यान एवं वनस्पति विभाग की वृहद संपदा की जानकारी दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ संध्या राय, डॉ. रामबाबू मेहर, डॉ निशा रिछारिया डॉ आभा वाधवा, डाँ.मनीषा तिवारी ,डॉ रीना मालवीय ,डाँ.कीर्ति दीक्षित डॉ. नीतू पवार, श्रीमती अंकिता तिवारी  देवेंद्र सैनी, शैलेंद्र तिवारी ने अपना सक्रिय सहयोग प्रदान  किया।