69 वां बौद्ध वार्षिकोत्सव 27को  महाबोधि महोत्सव 27-28 को भगवान बुद्ध के शिष्यों की पवित्र अस्थियों की होगी पूजा 

11:33 pm or November 24, 2021
दीपक कांकर
रायसेन 24 नवम्बर ;अभी तक;  कोरोना के कारण दो वर्ष बाद इस वर्ष 27 नव को 69 वा बौद्ध वार्षिकोत्सव समारोह आयोजित किया जाएगा तथा 27-28 नव को पर्यटन विकास निगम के तत्वावधान में दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव आयोजित किए जाएंगे जिसमें अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा ।
 स्तूपों की ऐतिहासिकता
तय स्थल एक विश्व ऐतिहासिक पर्यटक स्थल के रूप में विख्यात है इस स्थल की ऐतिहासिकता लगभग ढाई हजार साल पुरानी है इस नगर में स्तूपों को ढाई हजार साल पहले निर्मित कराया गया था  समय गुजरा देखरेख के अभाव में स्मारकों ध्वस्त होते चले गए तब पुरातात्विक दृष्टि के महत्व को देखते हुए अंग्रेजी शासन काल में वर्ष 1712 से 1919 के दौरान स्तूपों की खोज जानसन व जनरल कनिंघम ने अन्वेषण व उत्खनन के दौरान की थी इस खोज में स्तूपों के चारों ओर कलाकृति पूर्ण चारों ओर द्वार पायै गये थे तथा अनेक स्तंभ भी मिले थे इस पहाड़ी पर पहुंच मार्ग का अभाव था तब अंग्रेजी अधिकारियों ने ध्वस्त स्तूपों को मूर्त रूप देने का बीड़ा उठाया तथा निर्माण शुरू किया गया तथा ढहाये गये स्तंभ पुनः खड़े किए गए तथा इन स्तूपों को दर्शनीय रूप देना शुरू कर दिया गया तथा अंग्रेजी हुक्मरानों ने यहां पाई गई कलाकृतियां अपने देश ले जाने की योजना बनाई गई परन्तु किसी कारण वश ले जाई नहीं जा सकी
खोज के दौरान स्तूप क्र, 1 में मिली थी पत्थर की दो पेटी
 जब स्तूप क्रं 1 की खुदाई की जा रही थी तब खुदाई में दो पत्थर की पेटी पाई गईं थीं तब उनमें भगवान बुद्ध के दो परम शिष्य सारिपुत्र वह महामोदग्लाइन की पवित्र अस्थियां पाई गई थीं जिन्हें अंग्रेज अधिकारियों ने इंग्लैंड ले जाकर अल्वर्ड विक्टोरिया अजायबघर में रखा गया था देश आजाद हुआ तथा इन स्मारकों की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को सौंपी गई थी । आजादी के बाद भोपाल रियासत नवावी के दौरान नवाब भोपाल व भारत सरकार के प्रयासों से इन अस्थियों को वापस लाई गई । पवित्र अस्थियों को लाने के बाद इन्हें सुरक्षित रखने के लिए व्यवस्था जुटाई गई ।तब नवाबी हुकुमत के दौरान स्तूप पहाड़ी पर महाबोधि सोसायटी श्रीलंका को ढाई एकड़ भूमि आवंटित कर तथा 25 हजार रुपए की राशि स्वीकृत कर बौद्ध मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी गई तब बौद्ध चेत्य मंदिर का निर्माण हुआ तथा यह मंदिर 1952 में बनकर तैयार हुआ इस मंदिर में भगवान बुद्ध की प्रतिमा रखी गई तथा इसी के तल में इन पवित्र अस्थियों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई तब 1952 में ही आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू लेकर पवित्र अस्थियों को लेकर सांची पहुचे  तब रेलवे स्टेशन पर स्वागत तथा अगवानी करने उस समय भारत के उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन  तथा उनके साथ डा शंकर दयाल शर्मा तथा सिक्किम के महराज कुमार सहित अनेक देशों के राजदूतों ने पावन अस्थियों की अगवानी कर नवनिर्मित बौद्ध मंदिर ले जाया गया जहां तब प्रधानमंत्री नेहरू की मौजूदगी में मंदिर का उद्घाटन नवाब भोपाल हमीदुल्ला शाह जफर ने किया था तथा पावन अस्थियों को पूजा अर्चना कर पंडित नेहरू ने बौद्ध मंदिर में जनता के दर्शनार्थ रखा गया था ।
।पावन अस्थियों को की प्रथम पूजा अर्चना कर जनता के दर्शनार्थ रखने का दिन नव माह का अंतिम रविवार था ।
तब से ही इन पावन अस्थियों को नवं के अंतिम रविवार को ही पावन अस्थियों को निकाला जाता है तथा इनकी पूजा अर्चना कर स्तूप क्रं 1 की भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परिक्रमा कराई जाती है तथा इसके पश्चात इन पावन अस्थियों को जनता के दर्शनार्थ रखा जाता है तब से ही नवं माह के अंतिम रविवार की परिपाटी प्रारंभ हुई । तभी से अंतिम रविवार को बौद्ध मेला लगता है ।
मप्र सरकार ने शुरू किया दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव
विगत वर्षों में इस बौद्ध वार्षिकोत्सव को और अधिक भव्यता प्रदान करने तथा इसमें अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने मप्र सरकार ने भी कदम उठाते हुए महाबोधि महोत्सव के रूप में पर्यटन विकास विभाग के तत्वावधान में दो दिवसीय किया गया तथा इसमें अनेक सांस्कृतिक व विभिन्न कार्यक्रमों को विस्तार दिया गया तब से यह दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव के रूप में मनाया जाने लगा इस कार्यक्रम में देश विदेश से लाखों लोग शामिल होना शुरू हो गये । तथा विदेशों के सेकंडों हजारों बौद्ध अनुयाई इस अवसर पर भाग लेने पहुंचने लगे इस आयोजन के विस्तार को देखते हुए दूर दूर से विभिन्न प्रकार की सामग्री लेकर दुकानदारों का भी जमावड़ा लगने लगा । तथा इस कार्यक्रम के शुभारंभ व समापन अवसर पर देश विदेश के विशिष्ट अति विशिष्ट लोगों का भी आना-जाना आना जाना लगने लगा ।इसी के साथ इस कार्यक्रम में शामिल होने महाबोधि सोसायटी श्रीलंका के बिहाराधिपति भी हर वर्ष भाग लेने यहां पहुंचते हैं ।
आयोजन की तैयारी में जुटता है प्रशासन ।
हालांकि कोरोना महामारी के चलते दो वर्ष से रह कार्यक्रम आयोजित नहीं हो सका था अब जब सरकार से खुली छूट मिलते ही इस वर्ष यह आयोजन किया जा रहा है तब प्रशासन सभी तैयारियां पूरी कर रहा है इन तैयारियों में जिला प्रशासन स्थानीय प्रशासन के साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन हरकत में आ जाता है जगह जगह जांच पड़ताल तथा होटलों में ठहरने वालों की पड़ताल के साथ ही बसस्टेंड रेलवे स्टेशन सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर चोकसी बढ़ा दी जाती है साथ ही इस नगर को पूरी तरह कैमरों की जद में लाकर कैमरों से निगरानी शुरू कर दी जाती है ।

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