बेजुबानों के लिये की पानी की व्यवस्था अब गर्मी में नहीं होगी पशु, पक्षियों को परेशानी, लोग हुए जागरूक, रख रहे पानी के सकोरे

9:56 pm or May 6, 2022

प्रहलाद कछवाहा

मंडला 06 मई अभी तक. गर्मी में पानी को अमृत के समान माना जाता है। मनुष्य को प्यास लगती है तो वह कहीं भी मांग कर पी लेता है, लेकिन बेजुबान पशु पक्षियों को प्यास में तड़पना पड़ता है। हालांकि जब कोई बेजुबान प्यासा होता है तो वे घरों के सामने दरवाजे पर आकर खड़े हो जाते हैं। जिनमें कुछ लोग उन्हें पानी पिला देते हैं, और कुछ लोग भगा देते हैं। इस गर्मी में पशु पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए लोगों को प्रयास करना चाहिए।

                      जिला मुख्यालय के जागरूक लोग अपने अपने घरों के सामने, छतों पर, पेड़ों समेत अन्य स्थानों पर पशु पक्षियों को पानी पिलाने के लिए कई प्रकार की सुविधा कर रहे है। जिससे इस गर्मी में इन बेजुबानों को राहत मिलेगी। लोगों का कहना है कि मवेशियों के लिए भी कोटना अपने घरों के सामने रखना चाहिए। पानी का दुरूपयोग ना करे, उस पानी को घर के बाहर इन मवेशियों, पक्षियों के लिये रख दे। गर्मियों में कई परिंदों व पशुओं की मौत पानी की कमी के कारण हो जाती है। लोगों का थोड़ा सा प्रयास घरों के आस पास उडऩे वाले परिंदों की प्यास बुझाकर उनकी जिंदगी बचा सकता है। सुबह आंखें खुलने के साथ ही घरों के आस-पास गौरेया, मैना व अन्य पक्षियों की चहक सभी के मन को मोह लेती है। घरों के बाहर फुदकती गौरेया बच्चों सहित बड़ों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है।

                              गर्मियों में घरों के आसपास इनकी चहचहाहट बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि लोग पक्षियों से प्रेम करें और उनका विशेष ख्याल रखें। जिले में गर्मी भी अपनी चरम सीमा में है। जिले का तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है, तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी की संभावना भी है। जिससे गर्मी में मनुष्य के साथ-साथ सभी प्राणियों को पानी की आवश्यकता होती है। मनुष्य तो पानी का संग्रहण कर रख लेता है, लेकिन परिंदे व पशुओं को तपती गर्मी में यहां-वहां पानी के लिए भटकना पड़ता है। पानी न मिले तो पक्षी बेहोश होकर गिर पड़ते हैं। पशु पक्षियों की पानी की समस्या देखकर नगर के कुछ युवा, बच्चे, महिलाएं  इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था कर रहे है, जो सराहनीय है।
बढ़ती गर्मी में पानी से पक्षियों की बुझेगी प्यास, महिलाओं ने किया सार्थक प्रयास :

दिन प्रतिदिन तापमान बढऩे से सभी जीवों को प्यास लगना स्वाभाविक है और प्यास बुझाने के लिए पानी अमृत है। हम प्राणी तो अपनी प्यास बुझा लेते हैं लेकिन आकाश में उङते पक्षी पानी की तलाश में इधर उधर भटकते रहते हैं ऐसे में उनके जीवन की रक्षा करना हमारा दायित्व है और घर केआँगन ,घर की छत पर, बगीचे में पानी के सकोरे रखकर हम इन परिंदो की प्यास बुझा सकते हैं। इस तपन के मौसम में पानी नही मिल पाने के कारण हर साल काफी पक्षियों की मौत हो जाती हैं ऐसे में हमारे रोजाना के प्रयास से इन परिंदो के जीवन को बचाया जा सकता है। ।हर साल काफी परिवार इस पुनीत कार्य में अपना कर्तव्य पूरा कर रहे हैं और दूसरों को भी इसके लिए जागृत कर रहे हैं। बेजुबान पक्षियों की अकाल मृत्यु नही हो सके इसके लिए हमारे छोटे से प्रयास से इनका अनमोल जीवन सुरक्षित करके प्राकृतिक तालमेल यथावत रखा जा सकता है।
जल एवं पशु, पक्षी महत्वपूर्ण स्थान रखते है :
सर्वे भवंतु  सुखिन: सर्वे संतु निरामया इसी उद्देश्य को पूरा करते हुए पर्यावरण के प्रति प्रेम एवं पर्यावरण जागरूकता का संदेश देने स्कूली छात्र, छात्राएं भी आगे आ रहे है।  पर्यावरण में जल एवं पशु पक्षी भी हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। जिस प्रकार स्कूल की इमारत बच्चों के बिना सौंदर्य नहीं बिखेरती, उसी प्रकार जल एवं पशु पक्षियों के बिना पर्यावरण सुंदर नहीं लगेगा अत: पर्यावरण में जल एवं  जीव जंतुओं को सुरक्षित एवं संरक्षित करने महत्वता का संदेश देने भारत ज्योति  विद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं स्काउट, गाइड के बच्चों द्वारा पक्षियों के लिए सकोरे रखे। इस गर्मी के मौसम में जल का महत्व एवं पशु पक्षियों के लिए प्रेम का संदेश इन छात्रों के द्वारा दिया गया एवं समाज के अन्य लोगों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित किया। इस योगदान में शाला के प्रबंधक फादर जेम्स ड्डिसूजा साला की प्राचार्य सिस्टर शोभा फ्रांसिस संतोष रजक, राकेश सोनी, कमलेश रजक, समीर खान, आनंद सर एवं छात्र, छात्राए उपस्थित रही।
हर साल हो जाती हैं कई मौतें :
यदि हम यह सोंचे कि पक्षी-जानवर तो अपने लिए पानी का इंतजाम कर ही लेते होंगे, लेकिन ऐसा नहीं। एक समय था जब वे सच में अपने लिए पानी की व्यवस्था कर लेते थे, क्योंकि तब उनके लिए पानी के प्राकृतिक स्रोत नदी, तालाब समेत अन्य साधान आसानी से मिल जाते थे, लेकिन जंगलों, शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्त्रोत कम होते जा रहे है, जिसका असर जंगली जानवारों, पशु, पक्षियों पर पड़ रहा है। ये गर्मी के मौसम में पानी के लिए भटकने मजबूर है। गर्मी से सबसे ज्यादा  प्रभावित पक्षी होते है। पक्षी खाना और पानी की खोज में लगातार धूप में उड़ते रहने से वे कमजोर हो जाते हैं। इसके अलावा पेड़ों की कटाई-छंटाई के कारण कहीं रुककर आराम करने के लिए इनके पास कोई आशियाना भी नहीं होता है। हर साल पक्षियों के गिरने या घायल होने के ढेरों मामले सामने आते हैं। इन सबके चलते हर साल गर्मियों के मौसम में पक्षियों और जानवरों की मौत हो जाती है।

इन बातों का रखें ख्याल :

– घर के बाहर या बालकनी में छांव वाली जगह पर बर्तन में पानी भरकर रखें।
– पानी गर्म हो जाने पर समय-समय पर उसे बदलते रहें।
– कोई भी जानवर यदि खाना न खाए, सुस्त हो या उल्टी करे, तो डॉक्टर को दिखाएं।
– पानी और दाना आदि रख रहे हैं तो नियमित तौर पर इसे बरकरार रखें।
– इस चीज को सुनिश्चित कर लें कि पानी का बर्तन जानवर या पक्षी के आकार के लिहाज से उचित हो, ज्यादा छोटा या ज्यादा बड़ा बर्तन भी ठीक नहीं।

इनका कहना है

                              गर्मी में पानी को अमूल्य माना जाता है । हम अक्सर देखते हैं कि पक्षी जब भूखे प्यासे होते हैं तो हमारे घर के आँगन या छत पर आकर बैठ जाते हैं। आकाश में उङते परिंदो को इन दिनों में प्यास बुझाने के लिए घर के आँगन में सकोरे रखती हूँ और इस काम के लिए मेरी बेटी अनिका भी प्रोत्साहित करती है। रोजाना इस कार्य की करने से मन को बहुत राहत मिलती है कि हमारे इस पुनीत कार्य से पक्षियों की प्यास बुझाकर उनकी जीवन की रक्षा की जा सकती है इस संबंध में दूसरों को भी जागृत करती हूँ।
प्रियंका गुप्ता

                                         पर्यावरण के बदलाव की वजह से जीवों की जीवन शैली पर बहुत बुरा असर पङ रहा है ।गर्मी के मौसम में आकाश में उङते पक्षियों के लिए भोजन ,पानी, आश्रय और घोंसले की जरूरत को पूरा करना जटिल हो जाता है । इसलिए मानवता के धर्म को निभाते हुए गर्मी के इस मौसम में हमें उनकी देखभाल करना चाहिए ।मैं इसके लिए अपने घर के बगीचे और छत पर रोजाना पक्षियों के लिए पानी के सकोरे और दाना रखती हूँ जिससे परिंदो को भोजन मिल सके और उनकी प्यास बुझ सके ।
आकांक्षा ठाकुर

                                मुझे शुरू से ही पक्षियों से बहुत स्नेह रहा है इन परिंदो की कलकल ध्वनि मुझे बेहद पसंद है।मुझे आकाश में उङते परिंदो की प्यास बुझाने के लिए छत पर पॉट में पानी रखने में शुरू से ही रूचि रही है इसके साथ ही दाने भी रखती हूँ जिससे परिंदो की भूख मिट सके । प्यासे को पानी पिलाना हमारा कर्तव्य है। इस तपती गर्मी में पक्षियों के लिए पानी अमृत बन जाता है जिसको लेकर हम सभी को अपने घर के आँगन, छत पर पानी के सकोरे रखने के लिए हमेशा जागृत रहना चाहिए।
जसप्रीत गिल

ताकि न भटकें ये बेजुबान :
                                     जिस तरह से इंसारों के लिए जगह-जगह प्याऊ की व्यवस्था की गई है, ठीक वैसे ही पक्षियों के लिए भी प्याऊ की व्यवस्था करें, जिससे उन्हें भी गर्मी में साफ और ठंडा पानी मिल सके। क्योंकि भोजन तो जानवरों को कोई भी खिला देता है लेकिन साफ पानी न मिलने से उन्हें गर्मी में ज्यादा तकलीफ होती है। पानी खत्म होते ही दूसरा पानी और गर्म होते ही ठंडा पानी भरें, जिससे जानवरों को भी शुद्ध और ठंडा पानी मिल सके।  वहीं पक्षियों के लिए भी शिकारी जानवरों और पक्षियों से सुरक्षित रखते हुए ऐसे स्थान पर दाने की व्यवस्था कर दें। जिससे उन्हें खाने की तलाश में ज्यादा दूर न जाना पड़े।
इंद्रा उइके
—————————-