अब निरीक्षक को नहीं बन सकेंगे कार्यवाहक डीएसपी ; पुलिस मुख्यालय भोपाल

भिंड से डॉ रवि शर्मा

भिंड ९ सितम्बर ;अभी तक; एमपीपीएससी ने  वरिष्ठ निरीक्षकों को कार्यवाहक डीएसपी के रूप में पदोन्नत किए जाने पर रोक लगा दी गई है । इससे पदोन्नति की आस लगाए बैठे निरीक्षकों को करारा झटका लगा है क्योंकि इनकी सीनियर लिस्ट पुलिस मुख्यालय भोपाल पहले ही जारी कर चुका है प्रमोशन के लिए सभी तरह की औपचारिकता करने के बाद आदेश जारी होना ही बाकी रह गया था अब नहीं किया जा सकेगा ।

पीएससी का कहना है कि वर्तमान में प्रदेश में रिक्त सभी 138 डीएसपी के पद सीधी भर्ती से भरे जाएंगे मध्य प्रदेश पुलिस में ऐसे निरीक्षकों की संख्या काफी अधिक है जो इस पद पर लंबे समय से बने हुए हैं इनमें से कुछ तो 1 या 2 साल से ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं दूसरी तरफ डीएसपी के 200 के लगभग पद रिक्त होने से पुलिस के कार्य करने में परेशानी आ रही है चाहते हुए भी विभाग में शिक्षकों का प्रमोशन नहीं कर पा रहा था क्योंकि प्रमोशन में आरक्षण का मामला न्यायालय में विचाराधीन है ऐसे में बीच का रास्ता निकालते हुए कार्यवाहक प्रमोशन देने का निर्णय लिया गया ताकि न्यायालय में चल रहे प्रकरण का सम्मान करते हुए वरिष्ठ निरीक्षक का न्याय कर दिया जाए ऐसे निरीक्षकों को कार्यवाहक प्रमोशन तो दिया जाता लेकिन वह सुविधाएं नहीं मिलती जो नियमित प्रमोशंस में मिलती हैं ।

साथ ही डीएसपी के कम होने के कारण कार्यों में आ रही धन की स्थिति भी संभल जाती लेकिन पीएससी के फैसले से इसमें अड़ंगा लग गया इससे मनोबल पर पड़ेगा प्रभाव प्रमोशन के लिए सभी योग्यताएं और पात्रता होने के बावजूद इसके लाभ न मिलने का असर निश्चित रूप से उन निरीक्षकों के मनोबल पर पड़ेगा जिनकी सूची पुलिस मुख्यालय भोपाल में जारी कर दी थी बस प्रमोशन का आदेश होना ही बचा था हालांकि बताया जा रहा है कि इस संबंध में पुलिस मुख्यालय एवं साथ मध्यप्रदेश शासन संपर्क में हैं और कोई रास्ता निकल सकता है क्योंकि हो चुके थोक मैं प्रमोशन पिछले कुछ महीनों में पुलिस मुख्यालय ने कार्यवाहक के रूप में ठोक बंद प्रमोशन किए हैं जिसका लाभ आरक्षक प्रधान आरक्षक सहायक उपनिरीक्षक उपनिरीक्षक उठा चुके हैं । कुछ निरीक्षकों को भी पहली सूची में कार्यवाहक डीएसपी बनाया जा चुका है लेकिन अब पीएससी के इस फैसले ने कार्यवाहक पद के रूप में पदोन्नति पदोन्नति पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं यद्यपि उप निरीक्षक तक पदोन्नति करने का अधिकार पुलिस मुख्यालय को है वर्तमान में सहायक उपनिरीक्षक एवं उप निरीक्षक को कार्यवाहक पदोन्नति देने के लिए पुलिस मुख्यालय वरिष्ठता सूची भी जारी कर चुका है इन पर नहीं पड़ेगा प्रभाव पीएससी के आदेश का असर उन निरीक्षकों पर नहीं पड़ेगा जो पहले कार्यवाहक डीएसपी के रूप में प्रमोशन पा चुके हैं ऐसे 138 कार्यवाहक डीएसपी पूर्वक बने रहेंगे पदोन्नति के यह नियम है पुलिस विभाग में पदोन्नति दो जिसके तहत एक तो वह पुलिसकर्मी होते हैं जो सीधी भर्ती से व्यवहार में आते हैं जबकि दूसरे वह जो अपनी वरिष्ठता और योग्यता के चलते विभागीय पदोन्नति पाते हैं इनके पदोन्नति के लिए 50-50 का अनुपात रखा जाता है इस तरह यह प्रमोशन के अधिकारी होते हैं यदि प्रमोशन में आरक्षण का मामला न्यायालय तक न पहुंचा होता तो इसमें से अधिकांश प्रमोशन पा चुके होते अब न्यायालय एवं पीएसी के बीच 78 पदोन्नति पाने के हकदार होने के बावजूद कई निरीक्षक सेवा काल की अवधि पूरी होने के कारण डीएसपी बने बिना ही निरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हो जाएंगे