आयुष आपके द्वार” कार्यक्रम के अंतर्गत औषधीय  पौधों के वितरण का आयुष मंत्री श्री कावरे ने किया शुभारंभ

आनंद ताम्रकार

बालाघाट ३ सितम्बर ;अभी तक;

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एलोपैथी के साईड ईफेक्ट को देखते हुए लोग बड़ी संख्या में आयुर्वेद को अपना रहे है। आयुर्वेद बीमारियों के उपचार की प्राचीन पद्धति है। आयुर्वेद हमें बताता है कि हमारी दिनचर्या, खान-पान एवं आहार-विहार कैसा हो। आयुर्वेद से हमें नियमित एवं संयमित दिनचर्या रखने की प्रेरणा मिलती है। आयुर्वेद को हमे अपने जीवन पद्धति में अपनाने की जरूरत है। आयुर्वेद की दवाओं का कोई साईड इफेक्ट नहीं होता है। आयुर्वेद के प्रति आम जन में जागरूकता लाने की जरूरत है और इसी उद्देश्य को लेकर “आयुष आपके द्वार” कार्यक्रम प्रारंभ कर औषधीय पौधों का वितरण किया जा रहा है। औषधीय पौधे मानव जीवन की सुरक्षा के साथ युवाओं को रोजगार देने में भी मददगार बनेंगें। यह बातें मध्यप्रदेश शासन के आयुष मंत्री श्री रामकिशोर “नानो” कावरे ने “आयुष आपके द्वार” कार्यक्रम में औषधीय पौधों के वितरण के दौरान अपने संबोधन में कही।
                    आज 03 सितम्बर को रेंजर कालेज बालाघाट में आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत “आयुष आपके द्वार” कार्यक्रम जिले में प्रारंभ किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत की प्रधान श्रीमती रेखा बिसेन ने की। कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्री रमेश भटेरे, जनपद पंचायत बालाघाट के प्रधान श्री पूरनलाल ठाकरे, श्रीमती मौसम हरिनखेड़े, बालाघाट वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक श्री नरेन्द्र कुमार सनोडिया, वन मंडलाधिकारी श्री ग्रेजेश वरकड़े, श्री बृजेन्द्र श्रीवास्तव, उप वनमंडलाधिकारी श्री अमित पटौदी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनोज पांडेय, जिला आयुष अधिकारी डॉ शिवराम साकेत, सहायक संचालक उद्यान श्री सी बी देशमुख एवं ग्रामीण जन उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में उद्यान विभाग द्वारा 1500 औषधीय पौधे वितरण के लिए उपलब्ध कराये गये थे।
               कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आयुष मंत्री श्री कावरे ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि देश की आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम मनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत आयुष विभाग द्वारा वन एवं उद्यान विभाग के सहयोग से “आयुष आपके द्वार” कार्यक्रम प्रारंभ कर औषधीय पौधों का वितरण शुरू किया गया है। मध्यप्रदेश में एक वर्ष की अवधि में 75 लाख औषधीय पौधों के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। आज 03 सितम्बर के इस कार्यक्रम में 1500 औषधीय पौधे वितरित किये जा रहे है। यह कार्यक्रम गांव स्तर पर भी चलाया जायेगा और अधिक से अधिक लोगों को आयुर्वेद से जोड़ने का काम किया जायेगा।
बालाघाट में खुलेगा आयुष का रिसर्च सेंटर, अस्पताल एवं महाविद्यालय
               मंत्री श्री कावरे ने कहा कि जीवन में मानसिक तनाव न आने दें। यह तनाव ही बीमारियों का घर होता है। आयुर्वेद उपचार पद्धति में हम अपने आसपास उपलब्ध औषधीय पौधों से अपना ईलाज कर सकते है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति के घर के बगीचे में 16 प्रकार के औषधीय पौधे होना चाहिए। हल्दी, अदरक, गिलोय, कालमेघ, अश्वगंधा, तुलसी, ऐलोवेरा, शतावर इन 16 औषधीय पौधों में शामिल है। मंत्री श्री कावरे ने कहा कि बालाघाट जिले में शीघ्र ही आयुष रिसर्च सेंटर प्रारंभ किया जायेगा। बालाघाट जिले में 50 बिस्तर का आयुष अस्पताल भी प्रारंभ किया जायेगा। इसके लिए धापेवाड़ा में जमीन भी चिन्हित कर ली गई है। इसके साथ ही बालाघाट जिले में आयुष महाविद्यालय भी प्रारंभ किया जायेगा।
               जिला पंचायत की प्रधान श्रीमती रेखा बिसेन ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि आयुर्वेद हमारे ऋषि-मुनियों की जड़ी-बूटी से उपचार की पुरातन पद्धति है। आज के इस आधुनिक युग में इस पद्धति को लोकप्रिय बनाने एवं आम जन को इसके प्रति जागरूक बनाने की जरूरत है। हम सभी को आयुर्वेद पद्धति को अपने जीवन में अमल में लाना होगा। परिवार में किसी भी सदस्य का जन्म दिन केक काटने की बजाय औषधीय पौधा लगाकर एवं भेंट कर मनाने की परंपरा प्रारंभ करना चाहिए। आयुर्वेद आज के समय में हमारे जीवन के लिए बहुत आवश्यक हो गया है।
कोविड से मृत वन कर्मियों के परिजनों को दिया गया एक-एक लाख रुपये की राशि का चेक
                 कोविड काल में वन विभाग के 06 कर्मचारियों की मृत्यु हो गई है। वाईल्ड लाईफ ट्रस्ट आफ इंडिया संस्था द्वारा इन मृत कर्मचारियों स्वर्गीय श्री जमना प्रसाद मसराम, स्वर्गीय श्री शिखरचन्द्र यादव, स्वर्गीय श्री मांग्यालाल खरे, स्वर्गीय श्री लालसिंह मरावी, स्वर्गीय श्री अनिल श्रीवास्तव एवं स्वर्गीय श्री श्याम सिंह मरावी के परिजनों को एक-एक लाख रुपये की स्वीकृत की गई है। आयुष मंत्री श्री कावरे एवं अतिथियों द्वारा मृत कर्मचारियों के परिजनों को एक-एक लाख रुपये के चेक प्रदान किये।