*गणेश उत्सव विशेष – भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण*

महावीर अग्रवाल
 मंदसौर ११ सितम्बर ;अभी तक;  भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधों को धर्म से जोड़ा गया था l प्राचीन काल से ही हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव और प्रकृति के बीच संबंध विकसित कर दिए थे, ताकि मानव अपने निजी स्वार्थ के लिए प्रकृति को नुकसान ना पहुंचाएं इसलिए नदियो को मां का और पेड़ पौधों को भगवान का दर्जा दिया गया l विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे जैसे तुलसी,नीम रुद्राक्ष,सप्तपर्णी,नागदोन,हड़जोड़
आदि मनुष्य के लिए प्रकृति की अनुपम भेंट है l
           वैसे तो लगभग सभी पौधों की अपनी उपयोगिता है परंतु कुछ पौधे इतनी विशेष होते हैं कि उनके बिना कोई पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान अधूरा होता है| सभी प्रकार के अनुष्ठान में नारियल एवं सुपारी चढाई ही जाती है|  इनके अलावा परंपरागत रूप से कई वनस्पतिया विघ्न विनाशक गणेश जी को अर्पित कि जाती है जिनमें से अधिकांश औषधीय पौधे जैसे  शमी, बिल्व, भटकटैया, अपामार्ग, सेम, धतूरा, दुर्वा, बेर, सिंदूर, अगस्त, तेज, कनेर, कदली, अर्क, और अर्जुन, मरूआ, गंडारी, देवदास आदि होते है|
                गणेश पूजन में शमी की पत्तियां चढ़ाने के अलावा हवन में शमी की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है यह एक अत्यंत लाभकारी औषधीय पौधा है  | और हम सभी जानते हैं कि गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है उनकी विशेष कृपा पाने के लिए हम सभी पूजन में दुर्वा को अवश्य शामिल करते हैं | प्रत्येक हिंदू परंपरा के पीछे कई वैज्ञानिक रहस्य हैं हमारी भारतीय संस्कृति में त्रिवेणी, पंचवटी, नवग्रह  , नक्षत्र आदि के पौधो का विशेष महत्व है| अगर हम बात करें त्रिवेणी की तो यह बरगद, नीम और पीपल जैसे तीन महत्वपूर्ण वृक्षों का समूह है इनका पर्यावरण को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान है l
             शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में एक बार एक या कई बार इन तीन वृक्षों (त्रिवेणी) को रोपना एंव सिंचना चाहिए ऐसा करने से मानव का प्रत्येक क्षेत्र में कल्याण होता है ल पंचवटी पीपल,आंवला, बेल, बरगद, अशोक जैसे पांच वृक्षों का समूह है  जो धार्मिक,आध्यात्मिक एवं आयुर्वेदिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है |पंचवटी के आसपास का वातावरण काफी शुद्ध होता है जिससे मनुष्य शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है l
नवग्रहों के पेड़ -पौधे  जैसे पलाश, खैर, अपामार्ग, पीपल, गुलर, शमी,मदार, दूर्वा, कुशा l
ऐसी मान्यता है, कि ग्रह के कुप्रभाव को समाप्त करने के लिए इन वनस्पतियों के संपर्क में रहना लाभदायक होता है इसलिए धार्मिक स्थलों पर नवग्रह के पौधों को रोपित  एवं सिंचना चाहिए l
कोरोना काल में हम सभी ने किसी न किसी रूप में जड़ी बूटियों का सेवन करके अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया है यह सब प्राण संजीवनी जड़ी बूटियों के कारण संभव हो सका |
 भारत भूमि  जैव विविधता से भरपूर है औषधीय गुणों वाली विभिन्न वनस्पतियों के बारे में जितना वर्णन किया जाए उतना कम है
लेकिन पेड़ पौधों की अंधाधुंध तरीके से कटाई कि जा रही है जिससे कि हमारी जैवविविधता खतरे में आ गई है |औद्योगिकरण, उपभोक्तावादी संस्कृति, विकास के नाम पर हम प्रकृति का विनाश करते जा रहे हैं |
पेड़ पौधे हमारे जीवन की रक्षा करते हैं तो हमें भी वृक्षों की रक्षा करनी चाहिए हमें सस्टेनेबल डेवलपमेंट अपनाना चाहिए जिससे कि जैवविविधता बनी रहे और हम आने वाली पीढी को प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर धरती सौंप सकें और जिस हर्षोल्लास के साथ हम त्यौहार मनाते हैं आने वाली भावी पीढ़ी भी हमारी संस्कृति को बरकरार रखें और स्वच्छ वातावरण में प्रकृति की गोद में फूले फले साथ ही सभी त्योहारों को पूरे आनंद के साथ मनाएं |
(प्रेरणा मित्रा)
सहायक प्राध्यापक वनस्पति ,
पीजी कॉलेज ,मंदसौर