तपस्वियों के बहुमान समारोह में साध्वी श्री अमृतरसाश्रीजी मसा ने कहा जिन शासन के प्रति सदैव समर्पित भाव रखना चाहिए

7:09 pm or September 18, 2021
तपस्वियों के बहुमान समारोह में साध्वी श्री अमृतरसाश्रीजी मसा ने कहा जिन शासन के प्रति सदैव समर्पित भाव रखना चाहिए

महावीर अग्रवाल

मंदसौर १८ सितम्बर ;अभी तक;  नगर के जनकुपूरा स्थित जैन पौषधशाला में त्रिस्तुतिक जैन समाज श्रीसंघ द्वारा आयोजित चातुर्मास में साध्वीश्री अमृतरसाश्रीजी साध्वीश्री निरागरसाश्रीजी, साध्वीश्री जिनांशरसा श्रीजी मसा की पावन निश्रा में लगातार तप आराधनाएं चल रही है। अभी हाल ही में संपन्न पर्यूषण महापर्व के दौरान 141 अठाई (आठ दिन उपवास) का कीर्तिमान रचा गया था। इसके अतिरिक्त मासक्षमण, 11 और 16 उपवास की तपस्याएं भी पूर्ण हुई है। इन तपस्वियों का बहुमान शनिवार को मिश्रीलाल गजेन्द्रकुमार जी हींगढ परिवार द्वारा जैन महाविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में किया गया।

इससे पहले प्रातः 6.30 बजे धनकुट्टा गली जनकुपूरा स्थित पद्मावती मंदिर से एक चैत्य परवाडी निकाली गई जो भगवान अजीतनाथ मंदिर, भगवान आदिनाथ जैन मंदिर नयापुरा होते हुए नवलखा पाश्र्वनाथ मंदिर महू – नीमच रोड़ पर पहुंची। जहां पर साध्वी अमृतरसाश्रीजी मसा ने शासन स्र्पशना विषय पर धर्मसभा को संबोधित किया।

साध्वीश्री ने अनेक सच्ची कहानियों के माध्यम से जिन शासन की महत्ता को बताते हुए कहा कि हमें सदैव अपने समाज के प्रति समर्पित भाव रखना चाहिए। कितनी भी परेशानियां, समस्याएं आए हमें जिन शासन के प्रति समर्पण को डिगने नहीं देना चाहिए। उन्होने कहा कि तप आराधानाएं करने से कर्मो की निर्जला होती है इस बार तपस्याओं का अम्बार लगा ऐसे में तपस्वियों का बहुमान करना बहुत अच्छी बात है। जिन शासन के प्रति हींगढ परिवार का समर्पण भाव सदैव बना रहे ऐसा शुभाशीष।

कार्यकम में मिश्रीलाल हींगढ परिवार के गजेन्द्र हीगढ, हेमन्त हींगढ, श्रेयांश हींगढ, मनीष कोठारी आदि ने सभी तपस्वियों का बहुमान किया।
इस अवसर पर  विधायक यशपालसिंह सिसौदिया, पूर्व मंत्री नरेन्द्र नाहटा, त्रिस्तुतिक जैन समाज अध्यक्ष गजेन्द्र हींगढ, सकल जैन समाज संयोजक सुरेन्द्र लोढा, जिनेन्द्रकुमार मारू, गजराज जैन, चातुर्मास समिति अध्यक्ष सुधीर लोढा, सचिव मनोहर सोनगरा, अशोक खाबिया आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन धर्मेन्द्र कर्नावट ने किया अंत में आभार श्रेयांश हींगड ने माना।