माॅ की अंतिम इच्छा को पूरा किया सेवानिवृत्ति बेटे ने, ग्रामीण निर्धन प्रतिभाओ के सपने हो रहे है साकार

खरगोन से आशुतोष पुरोहित
  खरगोन ४  सितम्बर ;अभी तक;  खरगोन जिले के कसरावद नगर की राबिया लाइब्रेरी  इस अंचल के निर्धन छात्रों के ऊंचे सपनों को साकार करने का वरदान साबित हो रही है। संसाधनों के अभाव में घुटती प्रतिभाओं को यहां जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई है। इस उपक्रम का विचार ओर प्रेरणा देने वाली कसरावद नगर की 98 वर्षीय अल्पशिक्षित महिला  श्रीमती राबिया मुस्तफा खान है। श्रीमति राबिया की पहली पुण्य तिथि 31 दिसंबर 2018 से उनके पुत्र   आदिल खान ने पूर्णतः निजी व्यय से यह लाइब्रेरी स्थापित की है। इस लाइब्रेरी में राष्ट्रीय ओर राज्य स्तर पर होने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की नवीनतम उत्रकृष्ट पुस्तके ओर अन्य स्टडी मटेरियल सुलभ है। लाइब्रेरी की विशेषता यह है कि यह पूरी तरह निशुल्क है। प्रतियोगी पुस्तकों के साथ ही यहां विश्व साहित्य ओर भारतीय साहित्य की हिंदी ,अंग्रेज़ी ,उर्दू पुस्तके भी संग्रहित की गई है।
                 यहां कुरआन ,गीता ,रामायण ,बाइबल और उनसे संबंधित ज्ञानवर्धक पुस्तकों के साथ ही पत्रकारिता संबंधी पुस्तकों कि विस्तृत रेंज सुलभ है। अपने अल्प काल में ही यहां से एक छात्र ने नीट उत्तीर्ण कर जबलपुर मेडिकल कालेज में, एक छात्र ने यही के वेटेरनरी कॉलेज में प्रवेश लिया है।एक अन्य छात्र ने इसी वर्ष की कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट परीक्षा पास कर ली हैं।एक छात्र ने गत वर्ष जे एन यू  दिल्ली की पी एच डी एंट्रेंस परीक्षा उत्तीर्ण की है। कस्बाई अंचल में इस उपक्रम की सफलता को देखते हुऐ हाल ही में राजा भोज ओपन राज्य विश्वविद्यालय ने गत दिनों राबिया लाइब्रेरी को अपना  स्टडी सेंटर घोषित किया है।  अब तक अंकित मुजाल्दे , जबलपुर मेडिकल कालेज , रोहित सिसोदिया ,जबलपुर वेटनरी कॉलेज ,अमित , पीएचडी एंट्रेंस जेएनयू , छात्र भूपेश 142 वी रैंक सीएलएटी मे आई है। खास बात यह है की जिले के ग्रामीण अंचल के छात्र, छात्राओं को इन्दौर या महानगर नही जाना पढ रहा है।
*माॅ की इच्छा को बेटे ने की पूरी* – –
               आमतौर पर माॅ की इच्छा होती है की मरने के बाद बेटा या परिजन समाजिक रिती रिवाज करे और दान धर्म करे। लेकिन कसरावद की 98 वर्षीय अल्पशिक्षित महिला श्रीमती राबिया मुस्तफा खान की इच्छा थी की उनके नाम से एक ऐसे लाइब्रेरी खुले जिसमे निर्धन और जरूरत मंद बच्चे यहाॅ उपलब्ध पुस्तकों से अपने भविष्य को लेकर पढाई कर सके। उनके विचार और प्रेरणा को सार्थक किया सेवानिवृत्ति बेटे आदिल खान ने। श्रीमति राबिया की पहली पुण्य तिथि 31 दिसंबर 2018 को बिना प्रचार प्रसार के उनके पुत्र आदिल खान ने पूर्णतः निजी व्यय से यह लाइब्रेरी स्थापित की है। लगातार ग्रामीण बच्चो को मिल रही सफलता ने श्रीमति राबिया के सपने को साकार कर दिया है। खास बात यह है की आदिल खान ने इस लायब्रेरी में कोई भी शासकीय मदद नही ली है ना ही भविष्य में कोई विचार है। खान का कहना है की माॅ की इच्छानुसार ही लायब्रेरी को चलाया जायेगा। भविष्य में भी निरन्तर प्रतियोगी पुस्तकों यहाँ उपलब्ध रहेगी।
*अनुकरणीय पहल सुर्खियों में*
                 शिक्षा के क्षेत्र मे इस अनुकरणीय पहल से इन दिनो खरगोन जिले में ही नही प्रदेश में सुर्खियो मे लायब्रेरी आ गई है। हाल ही में राजा भोज ओपन राज्य विश्वविद्यालय ने गत दिनों राबिया लाइब्रेरी को अपना  स्टडी सेंटर घोषित किया है।