मेडिकल विश्वविद्यालय में व्यापमं से बडा घोटाला,  हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

सिद्धार्थ पांडेय

जबलपुर १६ सितम्बर ;अभी तक;  निर्धारित शुल्क लेने के बावजूद भी स्पॉट वेल्यूवेशन नहीं करवाये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि मेडिकल विश्वविद्यालय में व्यापमं से बडा घोटाला चल रहा है। हाईकोर्ट जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव व जस्टिस वीरेन्द्र सिंह की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद अनावेदकों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
प्राईवेट डेटल मेडिकल कॉलेज के बीडीएस फाइनल ईयर स्टूटेंट राजेन्द्र कैथवास व अन्य सात की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि मप्र मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी ने उनका रिजल्ट 1 जून 2021 को जारी किया था। इसके बाद विश्वविद्यालय ने 4 जून 2021 को नोटिफिकेशन जारी किया था कि छात्र स्पॉट वेल्यूवेशन के लिए दो हजार रूपये शुल्क जमा कर आवेदन कर सकते है। उनके द्वारा निर्धारित शुल्क जमा कर 14 जून 2021 को आवेदन किया गया था। आवेदन किये गये तीन माह से अधिक का समय गुजर गया है परंतु अभी तक स्पॉट वेरिफिकेशन नहीं करवाया गया है।

याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता आदित्य संघी ने बताया कि विश्वविद्यालय ने एक ऐसी कंपनी को परीक्षा के आयोजन तथा रिजल्ट बनाने का ठेका दिया था,जिसके खिलाफ आगरा मेडिकल विश्वविद्यालय ने अंकों की गडबडी करवाने के मामले में एफआईआर दर्ज करवाई है। मप्र मेडिकल यूनिवर्सिटी में व्यापमं से बडा घोटाला चल रहा है। यूनिवर्सिटी के पास याचिकाकर्ता छात्रों का डाटा ही नहीं है। जिसके कारण वह स्पार्ट वेरिफिकेशन नहीं करवा नहीं है। ब्लैक लिस्ट कंपनी को अंक घोटाले व अनियमिकताओं के निलंबित कर दिया गया है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में प्रमुख सचिव मेडिकल एजुकेशन तथा मेडिकल विश्व विद्यालय को अनावेदक बनाया गया है।