महावीर अग्रवाल
मन्दसौर १० जुलाई ;अभी तक ; स्थानीय नयापुरा रोड़ स्थित आदिनाथ जैन मंदिर (दादावाड़ी) में गुरू पूर्णिमा पर्व पर धर्मसभा का आयोजन हुआ, जिसमें साध्वी श्री अमितगुणाश्रीजी म.सा. ने गुरू की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरू सामान्य नहीं होता, उनकी महिमा अनन्त होती है। जीवन का सम्पूर्ण ज्ञान गुरू के पास निहित होता है, वे हमें सही राह दिखाते हैं और जीवन के अंधकार को मिटाते हैं।
साध्वीजी ने कहा कि जीवन में गुरू के रहने से वैराग्य उत्पन्न होता है और राग से मुक्ति मिलती है। व्यक्ति की प्रथम गुरू उसकी माता होती है, जो जीवन की कला सिखाती है और गुरू उस जीवन को निखारने की कला सिखाते हैं। जिनके जीवन में गुरू मिलते हैं, उनका भाग्य खिलता है।गुरु हमारे जीवन का आधार होते है जो हमारे अंधकार को मिटा कर सम्यक ज्ञान सम्यक चरित्र का निर्माण करते है और सन्मार्ग पर चलने के लिए मार्गदर्शन देते है
गुरु और माता का फर्क बताते हुए आपने कहा की जीवन की प्रथम गुरु माँ होती है माता हमें जन्म देती है गुरु हमें अजन्मा बनाते है माता की आँख मंे राग होता है गुरु की आँख मे वैराग्य होता है जो हमें संयम जीवन जीने की कला सिखाते है राग को मिटाने वाले गुरु होते है। महाराज सा. ने कहा की गुरु की महिमा परमात्मा से भी ऊपर है राम कृष्ण गौतम जितने भी महापुरुष तीर्थंकर हुए है उनके भी गुरु हुए है जीवन मे गुरु का होना आवश्यक है गुरु हमारे जीवन के गुरुर को खत्म कर हमें सन्मार्ग की और प्रकाशित कर हमारे जीवन को निर्मल पवित्र और पावन बना कर हमारी आत्मा का कल्याण करते है गुरु की महिमा अनंत होती है जिनके जीवन मे भाग्य का उदय होता है उन्हें लक्ष्मी मिलती है और जिनके जीवन मे शौभाग्य का उदय होता है उन्हें गुरु मिलते जिनके जीवन मे आत्ममस्ती होती है दुनिया मे उसकी ही बस्ती होती है
उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा काम समर्पण करना है। मन का समर्पण कठिन होता है, लेकिन वही सबसे महत्वपूर्ण है। अहंकार का त्याग करना और गुरू के प्रति समर्पित रहना चाहिए। गुरू नहीं होते तो साक्षात्कार संभव नहीं होता। गुरू के बिना जीवन अधूरा है, गुरू की कृपा से ही जीवन सफल होता है।
गुरू पूर्णिमा के अवसर पर साध्वीजी ने सभी से अपने अहंकार, अवगुण और दुर्गुण को अर्पण करने का आह्वान किया और आत्मा की शुद्धि का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर साध्वी श्री श्रेयंनदिता श्रीजी म.सा. का भी आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
धर्मसभा के दौरान गुरू पूजा का लाभ श्री राजमल, अभयकुमार, सत्यकाम, पलाश चौरड़िया परिवार ने लिया। इस दौरान प्रश्न मंच का आयोजन भी हुआ, जिसमें साध्वीजी ने जिज्ञासुओं के प्रश्नों के उत्तर दिए।
कार्यक्रम का संचालन श्री खरतरगच्छ श्रीसंघ अध्यक्ष कमल कोठारी ने किया। धर्मसभा में चातुर्मास समिति के अध्यक्ष अशोक मारू नाकोड़ा, आदिनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष अभय चौरड़िया, सुरेन्द्र डोसी, दिलीप लोढ़ा, अजीत लोढ़ा, अनिल लोढ़ा, कुशल डोसी, चन्द्रेश बाफना, अभय नाहटा, पारसचंद चंडावला, समरथ लोढ़ा, पूनमचंद भंडारी, देवेन्द्र चौधरी, राजेन्द्र धारीवाल, गोपालसिंह पोखरना, सुरेश कोठारी, अशोक लोढ़ा, ईश्वर भाई, धीरज लोढ़ा, राजेश बोहरा, राजेश कोठारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रवचन श्रवण कर पुण्य लाभ लिया।
गुरु और माता का फर्क बताते हुए आपने कहा की जीवन की प्रथम गुरु माँ होती है माता हमें जन्म देती है गुरु हमें अजन्मा बनाते है माता की आँख मंे राग होता है गुरु की आँख मे वैराग्य होता है जो हमें संयम जीवन जीने की कला सिखाते है राग को मिटाने वाले गुरु होते है। महाराज सा. ने कहा की गुरु की महिमा परमात्मा से भी ऊपर है राम कृष्ण गौतम जितने भी महापुरुष तीर्थंकर हुए है उनके भी गुरु हुए है जीवन मे गुरु का होना आवश्यक है गुरु हमारे जीवन के गुरुर को खत्म कर हमें सन्मार्ग की और प्रकाशित कर हमारे जीवन को निर्मल पवित्र और पावन बना कर हमारी आत्मा का कल्याण करते है गुरु की महिमा अनंत होती है जिनके जीवन मे भाग्य का उदय होता है उन्हें लक्ष्मी मिलती है और जिनके जीवन मे शौभाग्य का उदय होता है उन्हें गुरु मिलते जिनके जीवन मे आत्ममस्ती होती है दुनिया मे उसकी ही बस्ती होती है
उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा काम समर्पण करना है। मन का समर्पण कठिन होता है, लेकिन वही सबसे महत्वपूर्ण है। अहंकार का त्याग करना और गुरू के प्रति समर्पित रहना चाहिए। गुरू नहीं होते तो साक्षात्कार संभव नहीं होता। गुरू के बिना जीवन अधूरा है, गुरू की कृपा से ही जीवन सफल होता है।
गुरू पूर्णिमा के अवसर पर साध्वीजी ने सभी से अपने अहंकार, अवगुण और दुर्गुण को अर्पण करने का आह्वान किया और आत्मा की शुद्धि का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर साध्वी श्री श्रेयंनदिता श्रीजी म.सा. का भी आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
धर्मसभा के दौरान गुरू पूजा का लाभ श्री राजमल, अभयकुमार, सत्यकाम, पलाश चौरड़िया परिवार ने लिया। इस दौरान प्रश्न मंच का आयोजन भी हुआ, जिसमें साध्वीजी ने जिज्ञासुओं के प्रश्नों के उत्तर दिए।
कार्यक्रम का संचालन श्री खरतरगच्छ श्रीसंघ अध्यक्ष कमल कोठारी ने किया। धर्मसभा में चातुर्मास समिति के अध्यक्ष अशोक मारू नाकोड़ा, आदिनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष अभय चौरड़िया, सुरेन्द्र डोसी, दिलीप लोढ़ा, अजीत लोढ़ा, अनिल लोढ़ा, कुशल डोसी, चन्द्रेश बाफना, अभय नाहटा, पारसचंद चंडावला, समरथ लोढ़ा, पूनमचंद भंडारी, देवेन्द्र चौधरी, राजेन्द्र धारीवाल, गोपालसिंह पोखरना, सुरेश कोठारी, अशोक लोढ़ा, ईश्वर भाई, धीरज लोढ़ा, राजेश बोहरा, राजेश कोठारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रवचन श्रवण कर पुण्य लाभ लिया।


