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    आयुष्मान के लिए अनुबंधित निजी अस्पताल आयुष्मान से मिलने वाली सभी सेवाएं मरीजों को प्रदान करें : कलेक्टर श्रीमती गर्ग

    महावीर  अग्रवाल
    मंदसौर 17 फरवरी ;अभी तक ;   कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की डीजीआरसी कमेटी की बैठक सुशासन भवन स्थित सभा कक्ष में आयोजित की गई। बैठक के दौरान कलेक्टर ने निजी अस्पतालों को निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे अस्पताल जो आयुष्मान के लिए अनुबंधित है, वे अस्पताल आयुष्मान की सभी सेवाएं प्रदान करे। आयुष्मान के माध्यम से जितनी भी बीमारियों का इलाज किया जाता है उन सभी सेवाओं को प्रदान करें।
    सिर्फ नाम के लिए एक या दो सेवाओं को प्रदान न करके सभी सेवाएं दे। अगर सेवाएं नहीं है तो सेवाओं को जोड़ने के लिए आवेदन करें। आयुष्मान के लिए जो रिक्वायरमेंट पूरी होनी चाहिए वह सभी रिक्वायरमेंट पूरी करें। आम लोगों को आयुष्मान से मिलने वाली सभी सेवाओं के बारे में जानकारी दें। इसके लिए अस्पताल में हेल्पेड डेस्क स्थापित करें। जहां पर मरीजों को आयुष्मान में मिलने वाली सभी सेवाओं की जानकारी मिलेगी। सभी सेवाओं का सूचना बोर्ड अस्पताल में चस्पा करे। अस्पतालों में हेल्पेड डेस्क को सुद्रण करें। जहां पर मरीज के आने पर तुरंत मरीज का आधार कार्ड और समग्र आईडी लें और चेक करें कि, मरीज आयुष्मान का हितग्राही है या नहीं। अगर आयुष्मान का हितग्राही है तो मरीज से ओपीडी फीस नहीं लेवे। आयुष्मान हितग्राही से ओपीडी की फीस नहीं लेना है। क्योंकि ओपीडी की फीस का भी भुगतान आयुष्मान कार्ड के माध्यम से सरकार द्वारा किया जाता है। साथ ही अगर कोई आयुष्मान का हितग्राही है और निजी अस्पताल में भुगतान करके अपना इलाज कराना चाहता है तो इस संबंध में सबसे पहले आयुष्मान भोपाल को सूचित करें कि, उक्त व्यक्ति आयुष्मान का हितग्राही होकर स्वयं पैसे देकर इलाज करवाना चाहता है। बैठक के दौरान सीईओ जिला पंचायत श्री अनुकूल जैन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ चौहान, निजी अस्पताल के प्रबंधक, डॉ, मैनेजर मौजूद थे।
    जिला अस्पताल में जिन सेवाओं के डॉक्टर नहीं है, अगर कोई निजी अस्पताल के डॉक्टर या कोई स्पेशलिस्ट डॉ अगर उन सेवाओं के बदले सेवा देना चाहते हैं, तो उन डॉक्टर को आयुष्मान पैकेज रेट के अनुसार भुगतान किया जाएगा। जिले में निजी अस्पतालों के द्वारा प्रसव ऑपरेशन के माध्यम से अधिक से अधिक कराए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। उक्त संबंध में जांच चल रही है। जांच में दोषी पाए जाने पर अस्पताल एवं संबंधित डॉ के विरुद्ध कार्यवाही होगी।
    टीबी मुक्त भारत अभियान अंतर्गत जिले में 100 दिवसीय अभियान लगातार चल रहा है। उक्त अभियान में निजी अस्पताल ज्यादा से ज्यादा ओपीडी के मरीजों को एक्स-रे के लिए जिला अस्पताल में रेफरल करें। प्रतिदिन की रिपोर्ट भेजें। ओपीडी और एक्स रे के बीच में जो गैप है उसको कम करें। टीबी मरीजों को फूड बास्केट प्रदान करें।

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