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    इसीलिए केजरीवाल को अस्वीकार किया क्योंकि यह राजनीतिक के कालनेमि का अंत है…  *प्रलोभन से बनायी जाने वाली सरकारें स्थिर नहीं होती।*

    महावीर अग्रवाल
           मंदसौर ८ फरवरी ;अभी तक ;   आज दिल्ली की जनता ने लोकतंत्र का महत्व एवं नीतियों की राजनीति को अपना समर्थन देकर एक निर्लज, धूर्त, झूठे तथा लालची किस्म के व्यक्ति, जो कालनेमि की तरह दिल्ली को भ्रमित कर रहा था ऐसे केजरीवाल को घर का रास्ता दिखा दिया।
                                       इससे एक बात सिद्ध होती है कि भले ही प्रलोभन और झूठ के आधार पर कभी-कभी राजनीतिक दल सरकारें बनाने में सफल हो जाते है किंतु उनका यह भ्रम बहुत जल्दी टूट जाता है। नीति, सिद्धांत एवं जन कल्याण के कार्यक्रमों को संपन्न करने के सपनों को लेकर जो पार्टी राजनीति में चुनाव लड़ती है तथा विजयी होकर सरकार बनाती है, वही लंबे समय तक शासन कर सकती है। बशर्ते यह पार्टियां अपने सिद्धांतों पर कायम रह सके।
                                     लोकतंत्र में जोड़-तोड़ की राजनीति, दल-बदल की राजनीति, प्रलोभन की राजनीति तथा विपरीत विचारधारा के लोगों से गठबंधन, यह जनता के साथ सरासर धोखा होता है। इसलिए भारतीय जनता पार्टी सहित सभी दलों को इससे बचना चाहिए तथा जनता के सामने अनावश्यक प्रलोभन रखकर चुनाव लड़ने के मंसूबों को धीरे-धीरे त्याग देना चाहिए अन्यथा नीतिगत सिद्धांतों के आधार पर चलने वाली राजनीतिक पार्टियां भी लंबे समय तक अपनी शक्ति और अस्तित्व को स्थायी नहीं रख सकती।
                                          आज “आप पार्टी” की सरकार को दिल्ली की जनता ने नकार दिया, इससे यह सिद्ध होता है कि जनता प्रलोभन के आधार पर लंबे समय तक किसी को समर्थन नहीं देती बल्कि स्थाई विकास को महत्व देती है क्योंकि प्रलोभन का कोई अंत नहीं होता। इसलिए मुफ्त में बांटना बंद करो।
     *रमेशचन्द्र चन्द्रे*

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