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    धान के परिवहन में लगे वाहनों में जीपीएस लगाये जाने के शासन के निर्देषों का बालाघाट जिले में पालन नहीं

    आनंद ताम्रकार

    बालाघाट
    समर्थन मूल्य पर खरीदी गई शासकीय धान के परिवहन एवं कस्टम मिलिंग के माध्यम से जमा कराये जाने वाले चावल की मात्रा के परिवहन में लगे वाहनों में जीपीएस लगाये जाने के शासन के निर्देषों का बालाघाट जिले में पालन नहीं किया जा रहा है। अधिकांष वाहनों में जीपीएस लगा ही नही है जिसकी आड़ में धान एवं चावल की अफरा तफरी की जा रही है।

    धान प्राप्ति एवं चावल जमा कराये जाने के दौरान जीपीएस वालें वाहनों का उपयोग अनिवार्य करने के लिये षासन के खादय आपूर्ति उपभोक्ता सरक्षण विभाग द्वारा प्रेशित पत्र दिनांक 8/11/2024 एवं दिनांक 22/11/2024 को प्रेशित के माध्यम से जिला प्रबंधकों को आवष्यक निर्देष जारी किये गये है।

    इसी तारतम्य में 24 मार्च 2024 को जिला प्रबध्ंक नागरिक आपूर्ति निगम बालाघाट द्वारा पत्र के माध्यम से अनुबंधित राइस मिलर्स को निर्देषित करते हुये उल्लेख किया है की खरीफ विपणन वर्श 2024-25 की अवधि में उपार्जन केन्द्रों ओपन कैप गोदामों से धान की प्राप्ति एवं चावल की मात्रा जमा कराये जाने के दौरान जीपीएस वाहनों का उपयोग किया जाना अनिवार्य है।

    अनुबंधित राइस मिलर्स को जारी निर्देश में उल्लेख किया गया है की जीपीएस लगे वाहनों को ही धान प्राप्त करने भेजे एवं चावल जमा कराये जाने हेतु जीपीएस लगे वाहनों का उपयोग किया जाए और उन्हें आदेशित गोदामों,कैप में भिजवाये। अन्यथा जीपीएस ना लगे वाहनों को धान का प्रदाय एवं चावल जमा नहीं कराया जा सकेगा।

    निर्देशित पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है की वाहन की भार क्षमता के अनुसार धान का प्रदाय एवं चावल की मात्रा जमा कराई जा सकेगी। इस पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर बालाघाट,महाप्रबंधक उपार्जन नान, क्षेत्रिय प्रबंधक नान जबलपुर, जिला आपूर्ति अधिकारी बालाघाट एवं समस्त केन्द्र गोदाम एवं कैप प्रभारी, परिवहन ठेकेदार, षाखा प्रबंधक, वेयर हाउस को प्रेशित की गई है।

    वास्तविकता यह है की प्रदेष षासन द्वारा जारी इतने महत्वपूर्ण निर्देषों को ताक में रखते हुये बालाघाट जिले में ऐसे वाहनों के माध्यम से धान प्रदाय एवं चावल जमा कराया जा रहा है जिनमें जीपीएस सिस्टम लगा ही नही है।

    इसी कारण बिना जीपीएस लगे वाहनों में धान प्रदाय किया जा रहा है तथा चावल जमा कराया जा रहा है जिसके चलते सरकारी धान की खुलेआम कालाबाजारी करते हुये महाराश्ट्र एवं छत्तीसगढ़ के मिलर्स को बेचा जा रहा है।

    वर्श 2024-25 की अब तक की स्थिति में ऐसे अनेक मामले प्रषासन के संज्ञान में आये पुलिस द्वारा उन्हें अपने निर्धारित स्थान की ओर ना जाते हुये गोदिया जाते पकड़े गये लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया है जो प्रषासन के सरक्षण और मिलीभगत के बिना संभव नही है।

    अभी हाल ही में विगत सप्ताह तीन ट्रकों को पकड़ा गया जिसमें 20 लाख रूपये मूल्य की लगभग 400क्विंटल धान भरी हुई थी इन ट्रकों में जीपीएस लगा ही नही था जिसके कारण वे बैखोप होकर छिंदवाडा ना जाते हुये गोदिया मार्ग पर उन्हें पकड़ा गया।
    तीनों ट्रकों को जिला खादय आपूर्ति अधिकारी के आदेष पर जप्त कर लिया गया है एवं धान कटंगी के गोदाम में सुपुर्दगी में दे दी गई है।

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