महावीर अग्रवाल
मन्दसौर १७ जून ;अभी तक ; प्रो. अजहर हाशमी जी का जीवन साहित्य के सूफी संत की तरह बीता। वे जो लिखते थे, जो बोलते थे उन शब्दों को सबसे पहले अपने जीवन में आत्मसात करते थे। मैं दावे से कह सकता हूँ कि वे 20 वीं शताब्दी के जायसी थे। यह बात प्रसिद्ध साहित्यकार मंदसौर महाविद्यालय से सेवा निवृत्त प्राचार्य डॉ. ज्ञानचंद खिमेसरा ने कही। वे 16 जून को मंदसौर के साहित्य एवं मीडिया परिवार द्वारा नपा सभा कक्ष में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बोल रहे थे डॉ. खिमेसरा ने कहा कि प्रो. अजहर हाशमी जी उनके 50 वर्ष पुराने मित्र थे वे सामाजिक समरसता के प्रतीक थे।
इस अवसर पर वैज्ञानिक नरेन्द्र सिपानी ने कहा कि अजहर हाशमी जी साहित्य के साथ ज्योतिष विद्या के महान ज्ञाता थे। हाशमी जी साहित्य जगत में हमेशा याद आते रहेगें। संघ के वरिष्ठ गुरूचरण बग्गा ने कहा कि प्रो. हाशमी देश के उच्च कोटि के साहित्यकार थे। सभी धर्मग्रंथों के ज्ञाता थे वे सर्वधर्म के संवाहक थे। वरिष्ठ पत्रकार महावीर अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि वे विद्वान ज्ञाता थे साहित्य जगत में श्री हाशमी के सेवाएं हमेशा याद की जावेगी। मंदसौर महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य रविन्द्र सोहोनी ने कहा हम लोगों के घर में किताबें रहती है लेकिन प्रो. अजहर हाशमी जी किताबों के घर में रहते थे। वरिष्ठ पुरातत्व विद डॉ. कैलाश पाण्डे ने इस अवसर पर ग्राम रूनिजा में प्रो. अजहर हाशमी के साथ बिताये जीवन को याद किया। उन्होंने कहा कि प्रो. हाशमी की वाणी सर्वधर्म का उद्घोष करने वाली थे तथा राष्ट्रीय एकता से परिपुष्ट करने वाला लेखन था। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. घनश्याम बटवाल ने कहा कि वे ज्ञान के समन्दर थे, संस्कृति के पोषक व रक्षक थे। उनका गीत मुझको राम वाला हिन्दुस्तान चाहिए जन-जन तक पहुंचा है। वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश जोशी ने कहा कि प्रो. हाशमी को साहित्यिक एनसाइक्लोपीडिया कहें तो भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। धर्म से मुस्लिम किन्तु उनके अंदर का जो रचनाकार था वह पुरी तरह निरपेक्ष निरापद था। कुरान की आयतों की तरह उन्हें श्रीमद भागवत व गीता के श्लोक कंठस्थ थे। वरिष्ठ पत्रकार कोमल सिंह तोमर ने कहा कि उनका परिचय प्रो. हाशमी से 90 के दशक से था वे सरकार और व्यवस्था के खिलाफ खुलकर लिखते थे। वे साहित्य से तो संत थे ही कर्म से भी संत थे। शिक्षाविद् रमेशचंद्र चन्द्रे ने कहा सरस्वती जी प्रो. हाशमी पर मेहरबान थी वे महान साहित्यकार थे आयोजनों में सर्वाधिक तालियां उनके विचारों को ही मिलती थी। सेवा निवृत्त प्राचार्य डॉ. बी.आर. नलवाया ने कहा कि 1985 में बड़वाह के आयोजन में उनकी मुलाकात प्रो. हाशमी से हुई थी वे न केवल वेद उपनिषद् सभी धर्म ग्रंथों पर साधिकार बोलते थे। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. प्रीतिपालसिंह राणा ने कहा कि वे महान विद्वान थे उनके व्याख्यान से पूरा सदन उनसे जुड़ जाता था इस अवसर पर डॉ. राणा ने प्रो. हाशमी के गीत और मुक्तक भी सुनाए। सेवानिवृत्त इंजीनियर सुनील व्यास ने कहा कि उनका विराट व्यक्तित्व था जिसमें सभी धर्म समाहित थे। साहित्यकार असद अंसारी ने कहा कि वे इंसानियत का पैगाम थे इस मौके पर उन्होंने स्वरचित कविता भी सुनाई। युवा भाजपा नेता राजेश गुर्जर ने कहा कि प्रो. हाशमी का जीवन सरल, सहज था उनके बारे में जितना कहा जाए कम है। साहित्यकार नरेन्द्र भावसार ने कहा कि साहित्यकार कही नहीं जाते इतिहास में अजहर हाशमी जी की राम वाला हिन्दुस्तान चाहिये गीत का अपना मुकाम हमेशा रहेगा। साहित्यकार लाल बहादुर श्रीवास्तव, नरेन्द्र त्रिवेदी ने प्रो. हाशमी के निधन को साहित्य जगत की बड़ी क्षति बताते हुए काव्य पाठ किया। इस अवसर पर कवि नंदकिशोर राठौर, युवा पत्रकार अजय बड़ोलिया समाज सेवी अजीजउल्लाह खान, युवा कवि हरीश दवे, कर्मचारी नेता डॉ. अशोक शर्मा, सतीश नागर, दिलीप जोशी, सुरेश भावसार, हरिशंकर शर्मा, महेश त्रिवेदी, डॉ. देवेन्द्र पौराणिक, संजय भाटी, राजेश पाठक, सचिन पारिख, प्रकाश कल्याणी, हरिओम गंधर्व,लोकेश सामयानी अब्दुलबासित ने प्रो. हाशमी के विराट व्यक्ति को नमन करते हुए श्रद्धांजली अर्पित की। आयोजन का संचालन पत्रकार गायत्री प्रसाद शर्मा ने किया। आभार पत्रकार अब्दुल वाहिद रईस ने माना।
मंदसौर जिले से रहा विशेष नाता-
प्रो. हाशमी का मंदसौर जिले से विशेष नाता रहा है मंदसौर जिले के ग्राम रूनीजा में उनके मामा डॉ. हाफिज अब्दुल हई के यहां उनका बचपन बीता, आगर में प्रो. रहते हुए भी प्रोफेसर अजहर हाशमी का रूनिजा आना जाना रहता था। मंदसौर जिले के सुवासरा, धुंधड़का, पिपलिया व मंदसौर में उनके समय-समय पर व्याख्यान होते रहे। इस अवसर पर प्रो. अजहर हाशमी तथा अहमदाबाद हादसे में मृतजनों को सभी उपस्थितजनों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
मंदसौर जिले से रहा विशेष नाता-
प्रो. हाशमी का मंदसौर जिले से विशेष नाता रहा है मंदसौर जिले के ग्राम रूनीजा में उनके मामा डॉ. हाफिज अब्दुल हई के यहां उनका बचपन बीता, आगर में प्रो. रहते हुए भी प्रोफेसर अजहर हाशमी का रूनिजा आना जाना रहता था। मंदसौर जिले के सुवासरा, धुंधड़का, पिपलिया व मंदसौर में उनके समय-समय पर व्याख्यान होते रहे। इस अवसर पर प्रो. अजहर हाशमी तथा अहमदाबाद हादसे में मृतजनों को सभी उपस्थितजनों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


