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    सुनीता जी की स्मृति में लाड़ परिवार ने किया नवाचार…माहेश्वरी समाज ने तत्काल किया अनुकरण

    महावीर अग्रवाल

    मंदसौर ९ जुलाई ;अभी तक ;  नगर के कर्मकांड के प्रसिद्ध विद्वान स्व. पं. श्री भागीरथ लाड़ के परिवार में दुखद घड़ी आई उनके पुत्र पं. अनंत नारायण शर्मा (गुड्डू महाराज हलवाई)की धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता लाड़ का अस्वस्थता के चलते उपचार के दौरान निधन हो गया ।

    लाड़ परिवार के अग्रज पं. जगदीश लाड़ और पं. अनन्त नारायण लाड़ तथा परिवार जनों ने यह संकल्प व्यक्त किया कि सुनीता लाड़ की स्मृति में सर्व समाज को सकारात्मक संदेश देने हेतु यह नवाचार किया जाए कि उठावने में जो शोक संदेश ओर पत्र आते हैं आजकल यह परिपाटी हो गई है कि उठावने में इन शोक संदेश या पत्रों का वाचन किया जाता है

    जो संस्थाएं प्रेषक होती हैं उनके पदाधिकारी के नाम बोले जाते हैं

     फिर कुछ विशिष्ट व्यक्तियों के हाथों से वह शोकसंदेश पत्र परिजनों को सौंप जाते हैं। इस सारी प्रक्रिया में समय भी लगता है और यह भी अनुभव किया जाता है कि यह सब एक लौकिक प्रक्रिया है दिवंगत आत्मा का इससे कोई संबंध नहीं होता। अनावश्यक समय भी लगता है जो शोक संदेश या पत्र दिए जाते हैं वह व्यक्तिगत परिवार के लिए होते हैं। उन्हें उठावने में सार्वजनिक पढ़ना आवश्यक नहीं। श्री जगदीश विलास जीवागंज में 9 जुलाई बुधवार को सुनीता लाड़ के उठावने में लाड़ परिवार के इस नवाचार के संकल्प से समाज सेवी पत्रकार ब्रजेश जोशी ने सभी उपस्थित जन समुदाय को अवगत कराया।

    सभी ने लाड़ परिवार की इस पहल की सराहना की। ओर

    सर्व समाज से यह आव्हान किया गया कि उठावने की रस्म में शोक संदेश ओर ये पत्र देने वाले व्यक्तियों व संस्था पदाधिकारियों के नामों का उच्चारण और फिर कुछ लोगों को बुलाकर परिजनों को ये शोक पत्र सौंपने की प्रथा जो पहले कभी थी ही नहीं इसे

    नहीं किया जाए।

    संयोग देखिए कि सुनीता लाड़ का उठावना दोपहर 1:00 बजे जगदीश विलास जीवागंज में था और ठीक एक घंटे बाद 2:00 बजे महावीर भवन नई आबादी में माहेश्वरी समाज के गगरानी और पलोड़ परिवार में भी संयुक्त उठावना था। चूंकि सुनीता जी के उठावने में माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष महेश सोमानी बंकट और अन्य माहेश्वरी सामाजजन भी मौजूद थे उन्होंने यहां से प्रेरणा लेकर माहेश्वरी समाज के परिवार के उक्त संयुक्त उठावने में भी शोक संदेश नहीं पढ़ने वाली लाड़ परिवार की पहल का उदाहरण देते हुए शोक संदेशों का वाचन नहीं किया यहां भी इस निर्णय को सभी ने सराहा।और दिवंगत आत्मा को मोन श्रद्धांजलि ही दी।

    तो यह कहा जा सकता है कि नगर में ब्राह्मण और माहेश्वरी दो बड़े समाजों ने एक प्रगतिशील कदम उठाया है जिसकी सर्वत्र सराहना की जा रही है।

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