1971 के युध्द में भारतीय वायु, थल एवं नौ सेना ने सभी मोर्चो पर पाक को करारा सबक सीखाया- केप्टन डावर

महावीर अग्रवाल
मंदसौर 18 सितम्बर ; अभी तक;  1971 के युध्द में भारतीय सेना के शौर्य एवं सशक्त इंदिराजी के नेतृत्व से वर्तमान पीढी को अवगत कराने के उद्देश्य से जिला कांग्रेस मंदसौर द्वारा व्याख्यान माला का आयोजन जनपद पंचायत परिसर के समक्ष श्रम शिविर सभागार में किया गया। बांग्लादेश निर्माण के 50 वे वर्ष के उपलक्ष्य मे आयोजित व्याख्यान माला में 1971 के युध्द में सहभागी केप्टन प्रवीणजी डावर एवं पूर्व सांसद सुश्री मीनाक्षीजी नटराजन ने सहभागीता करते हुये तत्कालिन परिस्थितियो एवं इंदिराजी की अदम्य क्षमता पर प्रकाश डाला। इस दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक श्री नवकृष्ण पाटील भी मंचासीन थे।
                    मुख्य वक्ता केप्टन प्रवीणजी डावर ने कहा कि आम लोगो को यह धारणा है कि इंदिराजी को 1971 में जो बहुमत मिला था वो युध्द के परिणामो की देन है लेकिन सच यह है कि लोकसभा चुनाव 17 मार्च 1971 को जो परिणाम आये थे उस समय भारत पाक युध्द की कोई परिस्थिति और बांग्लादेश मे किसी भी प्रकार की कोई हरकत नही थी। जनता ने बिना किसी  युध्द की लहर के कांग्रेस को 392 सीटे प्रदान की थी।
                 श्री डावर ने कहा कि शेख मुर्जीबूर रहमान के नेतृत्व में पूर्व पाकिस्तान जो कि वर्तमान का बांग्लादेश है वहां 162 मे से 160 सीटे जीती जबकी पश्चिमी पाकिस्तान में पाकिस्तान पीपुल्स लीग ने 118 सीटे जीती। जनता का आदेश स्वीकार करना था लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान के हुकमरानो ने सत्ता हस्तांतरण से इंकार करते हुये सेनिको के माध्यम से कत्लेआम शुरू कर दिया। लगातार हत्याओं एवं प्रताडना के चलते बांग्लादेशी नागरिको की लगातार संख्या बढती गयी और लगभग एक करोड बांग्लादेशी भारत में आ गये। चहुंओर से भारत मे आते शरथार्थियो की समस्याओ को देखते हुये विश्व के अनेक देशो के बीच पहुंचकर तत्कालिन प्रधानमंत्री इंदिराजी ने पूर्व पाकिस्तान के हालातो से अवगत कराया। बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी के नायक शेख मुर्जीबूर रहमान को समर्थन देते हुये इंदिराजी ने अलग देश की मान्यता देते हुये पाक हमलो से निपटने के लिये बांग्लादेश में वायु सेना के माध्यम से जोरदार प्रहार करते हुये पुरी पाक वायु सेना का नाश कर दिया। केप्टन डावर ने कहा कि युध्द काल में भी कभी भी नेहरूजी एवं इंदिराजी ने सदन को नही रोका। प्रतिदिन इंदिराजी युध्द का वर्णन सदन में रखती थी। उन्होनें कहा कि कहा कि भारतीय सेना के लगभग 2047 जवान एवं लगभग दस हजार सैनिक घायल हुये। पूर्वी पाकिस्तान में 93 हजार पाक सेनिको ने समपर्ण किया। भारत की वायु सेना, नो सेना एवं थल सेना सभी मोर्चो पर पाक पर भारी पडी। पाकिस्तान का कराची बदरगांह भारतीय नौ सेना के प्रहारो के कारण 13 दिन तक लगातार जलता रहा। केप्टन श्री डावर ने कहा कि आज की सत्ता इतिहास को बताना नही चाहती है, सिर्फ वो ही बताया जा रहा है जिससे उन्हें राजनैति फायदा हो।
                   पूर्व सांसद एवं अखिल भारतीय पंचायती राज संगठन की अध्यक्ष सुश्री मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि भारत का विभाजन के समय पाकिस्तान का निर्माण हुआ उस समय भारत का विशाल भू- भाग पूर्वी एवं पश्चिमी पाकिस्तान के बीच था। एक धर्म के बावजुद भाषा, वेशभूषा सबकुछ अलग था लेकिन उसके बावजुद पाकिस्तान बना। इंदिराजी का सशक्त नेतृत्व तत्कालिन समय में न तो चीन से घबराया और नही अमेरिका जैसी महाशक्ति से विचलित हुआ। बांग्लादेशी शरणार्थियो की आयी बाढ की समस्या से निपटना और भारत में होते खराब हालातो के बीच पुरे विश्व में भारत के हालातो से अवगत कराते हुये साहसिक फैसला लिया। उस फैसले के कारण पाकिस्तान का भूगौल बदला है।
                 प्रारंभ में मंचासीन अतिथियो का गुदलस्ते भेंट करके स्वागत करने के उपरांत स्वागत उदबोधन देते हुये जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री नवकृष्ण पाटील ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुये केप्टन प्रवीणजी का परिचय कराया। इसके साथ ही उन्होने व्याख्यान माला की जानकारी उपस्थित श्रोताओ को दी।
                  इस अवसर पर कांग्रेस जिला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्षगण, ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्षगण, मोर्चा संगठनो के अध्यक्षगण, विभिन्न संगठनो के पदाधिकारीगण एवं आम कार्यकर्ता उपस्थित थे।
                 संचालन पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मोहम्मद हनीफ शेख ने किया व आभार जिला कांग्रेस प्रवक्ता सुरेश भाटी ने माना। व्याख्यान माला का समापन राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रभक्तिमय माहौल मे किया गया।