महावीर अग्रवाल
मन्दसौर १६ फरवरी ;अभी तक ; चैतन्य व्यक्ति और चैतन्य अंतर्मन ही एक स्वतंत्र, निर्भय व निर्विकार जीवन जी सकता है । वैसे तो हम राजनीतिक रूप से स्वतंत्र हो गए हैं किंतु हमारे अचेतन मन में पीढ़ी दर पीढ़ी एक हजार वर्ष की परतंत्रता के कारण गुलामी मानसिकता का भाव बहुत गहराई से बैठ गया है और ऊपर से विडम्बना यह है कि हम उसे समझ ही नहीं पा रहे हैं । यही हमारे विकास में सबसे बड़ी बाधा है ।
उक्त विचार अनुराग संस्था के संस्थापक गोपालकृष्ण पंचारिया ने व्यक्त किए । वे बड़ी होली, किला रोड स्थित प्राचीन श्री भीमाशंकर महादेव मंदिर पर राष्ट्र व सनातन जागरण अभियान के अंतर्गत अनुराग संस्था व ब्रह्म परिषद के संयुक्त आयोजन में “स्वतंत्रता एवं हमारा अज्ञात भीरूपन” विषय पर अपने विचार रख रहे थे । विषय को विस्तार देते हुए पंचारिया ने कहा कि इस परतंत्रता के भाव के कारण हमारे हृदय में एक अज्ञात भीरूपन घर कर गया है । जिसके कारण प्रत्येक परिवार को आर्थिक व सामाजिक रूप से बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है । इस विषय पर हमारे धर्माचार्यों, साधु संतों, प्रवचनकारों व बुद्धिजीवियों को खुलकर चर्चा करना चाहिए ताकि हम इस अज्ञात भीरूपन से निकलकर एक स्वाभिमानी व वास्तविक रूप से स्वतंत्र जीवन जी सकें । स्वयं को समर्थ बनाकर विकसित भारत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर सकें ।
परिचर्चा में अपने विचार रखते हुए सुरेशचंद्र राठौर ने कहा कि हमारे ऊपर परतंत्रता का प्रभाव इतना गहरा है कि उसने हमारी सोचने की क्षमता को ही कुंद कर दिया है । हम भीड़ तंत्र, दिखावा व देखा – देखी के चक्रव्यूह में हम बुरी तरह से फंस चुके हैं और इसका हमारे मानसिक तनाव व हमारी आर्थिक स्थिति पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है । हम किसी समारोह में इस डर से जाते हैं कि मैं नहीं जाऊंगा तो मेरे यहां कौन आएगा । यही हमारा अज्ञात भीरूपन है । जबकि हमें श्रद्धा भावना के साथ जाना चाहिए ।
इस अवसर पर अनिल चंद्रावत ने बताया कि हम “लोग क्या कहेंगे” इसी बात से डरे हुए रहते हैं । आपके यहां समारोह में एक हजार व्यक्ति आए या पांच हजार, वह समारोह ही कहलाएगा और यदि आपके यहां सौ या पचास व्यक्ति भी आएंगे तब भी वह समारोह ही कहलाएगा ।
आपके यहां आयोजन में बड़ी संख्या के कारण आपको कोई बड़ा सम्मान या कोई बड़ा पुरस्कार नहीं मिल जाता है लेकिन हां आप एक बहुत बड़ी आर्थिक व मानसिक तनाव से राहत अवश्य अनुभव करेंगे एवं आपको अपने जीवन में इस अनावश्यक दिखावे के दबाव में आकर अधिक भागदौड़ व अधिक धन कमाने के चक्कर में गलत मार्ग नहीं अपनाना पड़ेगा । आप एक बहुत ही शांत, सुखद व आनन्दमय जीवन जी पाएंगे ।


