महावीर अग्रवाल
मन्दसौर १८ फरवरी ;अभी तक ; जिला अभिभाषक संघ अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2025 में प्रस्तावित बदलावों का पुरजोर विरोध करता है। इस विधेयक में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो अधिवक्ताओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन करते हैं और उनके स्वतंत्र कार्य करने की क्षमता को बाधित करते हैं। यह विधेयक अधिवक्ताओं के हितों पर कुठाराघात करने वाला है तथा उनके कार्यों पर अनावश्यक नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास करता है।
एक दिवसीय कार्य बहिष्कार एवं शांतिपूर्ण प्रदर्शन
जिला भाभिभाषक संघ अध्यक्ष श्री रघुवीर सिंह पँवार ने बताया कि मन्दसौर जिला अभिभाषक संघ ने निर्णय लिया है कि दिनांक 20 फरवरी 2025 को एक दिवसीय कार्य से विरत् रह कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से सरकार से यह मांग की जाएगी कि प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2025 को तुरंत वापस लिया जाए। हम न्यायपालिका और सरकार से अनुरोध करते हैं कि अधिवक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की जाए और इस विधेयक के दुष्परिणामों को ध्यान में रखते हुए इसे रद्द किया जाए।
जिला अभिभाषक संघ, मन्दसौरसंशोधन विधेयक में अधिवक्ताओं के लिए कुछ प्रमुख आपत्तिजनक प्रावधान निम्नलिखित हैं:
अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता पर आघात – प्रस्तावित विधेयक में अधिवक्ताओं को हड़ताल या बहिष्कार करने से रोका गया है (धारा 35A), जो अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है।3.
अत्यधिक एवं अन्यायपूर्ण जुर्माना – इस विधेयक में अधिवक्ताओं पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है (धारा 35), जिसे लागू करने की प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण हो सकती है।5.
झूठी शिकायतों के प्रति असंतुलित रवैया – यदि कोई शिकायत झूठी पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन यदि किसी अधिवक्ता पर झूठी शिकायत दर्ज की जाती है, तो उसके लिए कोई सुरक्षा प्रावधान नहीं है।
अनावश्यक सत्यापन प्रक्रिया – अधिवक्ताओं को अपने डिग्री, कार्यालय आदि का हर पाँच वर्षों में सत्यापन (ऑडिट) करवाना अनिवार्य किया गया है, जो अनावश्यक प्रशासनिक बोझ डालता है।.
बार काउंसिल ऑफ इंडिया को अनुचित अधिकार – इस विधेयक के अनुसार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया को किसी भी अधिवक्ता को तुरंत निलंबित करने का अधिकार दिया गया है (धारा 36), जिससे अधिवक्ताओं के अधिकारों का हनन होगा और यह प्रावधान दुरुपयोग को बढ़ावा देगा।
विदेशी फर्मों पर नियंत्रण – इस विधेयक के अंतर्गत विदेश में काम कर रहे भारतीय अधिवक्ताओं पर भी ये नियम लागू होंगे, जिससे उनकी स्वतंत्रता प्रभावित होगी।
बिना प्राधिकरण के कानून का कार्य करने पर दंड – बिना मान्यता प्राप्त योग्यता के किसी भी व्यक्ति को कानून का कार्य करने पर दंडित किया जाएगा, जो अधिवक्ताओं पर अनावश्यक दबाव बनाएगा।


