महावीर अग्रवाल
मन्दसौर २० अप्रैल ;अभी तक ; भारतीय सनातन संस्कृति में हमारे सभी आराध्य भगवान, देवी, देवताओं के एक हाथ में शस्त्र व दूसरे हाथ में शास्त्र हैं । इसका सीधा अर्थ यह है कि हमारे यहां सुरक्षा व्यवस्था को विशेष महत्व प्रदान किया गया है क्योंकि जब मानव सुरक्षित रहेगा, जीवित रहेगा तभी तो यह जीवन चक्र सुचारू रूप से चल पाएगा । लेकिन पिछले एक हजार वर्ष की गुलामी ने हमारी मानसिकता को बुरी तरह से भीरू बना दिया है ।
उक्त विचार श्रीमती यशोदा राठौर ने व्यक्त किए । वे बड़ी होली, किला रोड स्थित प्राचीन श्री भीमाशंकर महादेव मंदिर पर राष्ट्र व सनातन जागरण अभियान के अंतर्गत अनुराग संस्था व ब्रह्म परिषद के संयुक्त आयोजन में *”जीवन के लिए सबसे आवश्यक तत्व -सुरक्षा” विषय पर अपने विचार रख रहे थे ।
परिचर्चा में अपने विचार रखते हुए समाजसेवी सुरेशकुमार सावरा ने कहा कि सुरक्षा का पहला पाठ संगठित होना है । जब तक संगठित नहीं होंगे तब तक हम सुरक्षित नहीं हो सकते । भारत में ही नहीं वरन पूरी दुनिया में ही सज्जनता, मानवता पर संकट दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है ।
इस अवसर पर समाजसेवी बंशीलाल टांक ने बताया कि हमारी सनातन संस्कृति में जीवन के लिए आवश्यक तत्व वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी एवं आकाश को माना गया है जो कि शाश्वत सत्य भी है । लेकिन वर्तमान में मानव की सुरक्षा ही संकट के घेरे में आ गई है इसलिए आज का सबसे गंभीर व अहम प्रश्न हमारी सुरक्षा का खड़ा हो गया है । जब हम ही सुरक्षित व जीवित नहीं रहेंगे तब हम इन पंच तत्वों का क्या करेंगे ?
अनुराग संस्था के संस्थापक गोपालकृष्ण पंचारिया ने कहा कि भारत का विभाजन, कश्मीर से कश्मीरी पंडितों का पलायन और सबसे ताजा उदाहरण पश्चिम बंगाल का हैं जहां अपने देश के नागरिकों को एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन करना पड़ रहा है । यह बहुत ही भयावह स्थिति है । सुरक्षा भाव पैदा करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है । सुरक्षा भाव ही राष्ट्र को सुरक्षित रखेगा ।


