महावीर अग्रवाल
मंदसौर १० जुलाई ;अभी तक ; मानव जीवन में गुरू होना अति आवश्यक है। गुरू का सानिध्य प्राप्त करने के लिये हमें सदैव प्रयासरत रहना चाहिये। गुरू का सानिध्य मिलने पर हमारा आचरण मर्यादित होना चाहिये। कई बार हम उनसे सांसारिक मोह के काम की चर्चा करते है जो कि उचित नहीं है। गुरू से हमारी चर्चा ज्ञान धर्म पर केन्द्रित होना चाहिये।
उक्त उद्गार पर प.पू. जैन साध्वी श्री सुचिता श्रीजी म.सा. ने साध्वी श्री शीललेखा श्रीजी म.सा. के सानिध्य में आयोजित धर्मसभा में कहे। आपने यहां गुरूवार को गुरू पूर्णिमा पर्व पर आयोजित धर्मसभा में कहा कि जीवन में हमारा लक्ष्य गुरू तत्व अर्थात गुरू की कृपा को पाना होना चाहिये लेकिन हम कई बार सांसारिक बाते लेकर उनके पास जाते है। बच्चों की शादी, घर सम्पत्ति के विवाद इस पर चर्चा करते है। ऐसा करके आप गुरू को भी पाप के दलदल में डालने जैसा पाप करते है। ऐसा हमें नहीं करना चाहिये। जीवन में हमें श्रावक श्राविका के मर्यादित जीवन को समझते हुए आचरण करना चाहिये। जीवन में हमारा आचरण शुद्ध होना जरूरी है।
प्रतिदिन हो रहे प्रवचन-आराधना भवन श्रीसंघ अध्यक्ष दिलीप राका ने बताया कि दिनांक 9 जुलाई से प्रतिदिन प्रातः 9 से 10 बजे तक साध्वीजी के प्रवचन आराधना भवन के हाल में प्रारंभ हो गये है। धर्मालुजन अधिकाधिक संख्या मंे आकर प्रवचन लाभ ले।
उक्त उद्गार पर प.पू. जैन साध्वी श्री सुचिता श्रीजी म.सा. ने साध्वी श्री शीललेखा श्रीजी म.सा. के सानिध्य में आयोजित धर्मसभा में कहे। आपने यहां गुरूवार को गुरू पूर्णिमा पर्व पर आयोजित धर्मसभा में कहा कि जीवन में हमारा लक्ष्य गुरू तत्व अर्थात गुरू की कृपा को पाना होना चाहिये लेकिन हम कई बार सांसारिक बाते लेकर उनके पास जाते है। बच्चों की शादी, घर सम्पत्ति के विवाद इस पर चर्चा करते है। ऐसा करके आप गुरू को भी पाप के दलदल में डालने जैसा पाप करते है। ऐसा हमें नहीं करना चाहिये। जीवन में हमें श्रावक श्राविका के मर्यादित जीवन को समझते हुए आचरण करना चाहिये। जीवन में हमारा आचरण शुद्ध होना जरूरी है।
प्रतिदिन हो रहे प्रवचन-आराधना भवन श्रीसंघ अध्यक्ष दिलीप राका ने बताया कि दिनांक 9 जुलाई से प्रतिदिन प्रातः 9 से 10 बजे तक साध्वीजी के प्रवचन आराधना भवन के हाल में प्रारंभ हो गये है। धर्मालुजन अधिकाधिक संख्या मंे आकर प्रवचन लाभ ले।
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