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धर्म पर विश्वास रखो, मैना सुंदरी से प्रेरणा लो- साध्वी श्री अर्हताश्रीजी

महावीर अग्रवाल

मन्दसौर २२ अक्टूबर ;अभी तक;  मानव को अपने धर्म पर सच्ची श्रद्धा रखनी चाहिये। धर्म में जो बातें कही गई है उन पर चलना चाहिये। धार्मिक ग्रंथ केवल पुस्तकें नहीं है ज्ञान का भण्डार है हम अपने जीवन में धर्म का सही अर्थ व स्वरूप समझे। मैना सुंदरी का वृतान्त हमें प्रेरणा देता है कि हम धर्म अडिग रहे चाहे इस मार्ग में कितनी ही चुनौतियां क्यों न आये।
                                उक्त उद्गार परम पूज्य जैन साध्वी श्री अर्हताश्रीजी म.सा. ने चौधरी कॉलोनी स्थित रूपचांद आराधना भवन में कहे। आपने रविवार को यहां धर्मसभा में कहा कि मैना सुंदरी के पिता प्रजापाल राजा को यह अहंकार था कि उनके परिवार को जो सुख समृद्धि मिली है यह केवल उनके कारण मिली है जबकि उनकी पुत्री मैना सुंदरी का मत था कि यह सब पूर्व भव के पूण्य से मिली है। इस विषय पर दोनों के मतभेद हुए और मैना सुंदरी क पिता प्रजापाल राजा ने मैना सुंदरी का विवाह कुष्ठ रोगी से करने का विचार किया। पिता से इस विषय पर मतभेद होने पर भी मैना संुदरी र्ध्मा का मार्ग नहीं छोड़ती है ओर उसके पिता उसका विवाह कुष्ठ रोगी से करने का विचार करते है। लेकिन मैना सुंदरी धर्म पर अडिग रहती है। साध्वी ने धर्मसभा में कहा कि हमें मैना सुंदरी की कथा से प्रेरणा लेनी चाहिये और धर्म पर अडिग रहना चाहिए तथा जो सत्य है उससे पीछे नहीं हटना चाहिये। मनुष्य के जैसे कर्म होंगे वैसा फल मिलेगा इसलिये अच्छे कर्म करने का प्रयास करें सदैव पूण्य कर्म करो धर्म पर अडिग रहो। सत्य व धर्म की खातिर त्याग करने के लिये तैयार रहो। प्रभु महावीर ने हमें जो धर्म की राह दिखाई है उसे समझो। कर्म बंधन को जो महत्ता है उसे समझो। जीवन में यदि अनुकूल कार्य नहीं हो तो दूसरे को दोष मत दो। धर्म की खातिर मैना सुंदरी कुष्ठ रोगी से भी विवाह को तैयार हो जाती है। मैना सुंदरी को अपने धर्म पर अडिग विश्वास था और वह कुष्ठ रोगी से पिता की आज्ञा विवाह को तैयार हो जाती है। धर्म सभा के उपरांत सोभागमल हिम्मतलाल संघवी परिवार के द्वारा प्रभावना वितरित की गई। धर्मसभा में बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित थे।

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