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डीपफेक से उत्पन्न मुद्दों पर हितधारकों के साथ रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव की बातचीत

महावीर अग्रवाल
मन्दसौर  २३ नवंबर ;अभी तक;  डीपफेक दुनिया भर में लोकतंत्र और सामाजिक संस्थानों के लिए एक गंभीर खतरा बनकर उभरा है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से डीपफेक सामग्री के प्रसार ने इस चुनौती को बढ़ा दिया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने समय-समय पर सोशल मीडिया मध्यस्थों को उचित परिश्रम करने और डीपफेक के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई करने की सलाह दी है।
                                    इससे पहले आज, रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने डीपफेक पर प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर शिक्षा जगत, उद्योग निकायों और सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। चर्चा के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि सरकार, शिक्षा जगत, सोशल मीडिया कंपनियां और NASSCOM संयुक्त रूप से डीपफेक का जवाब देने की दिशा में काम करेंगे। इस बात पर भी सहमति हुई कि अगले 10 दिनों के भीतर निम्नलिखित चार स्तंभों पर कार्रवाई योग्य वस्तुओं की पहचान की जाएगी:
1. पता लगाना: ऐसी सामग्री पोस्ट करने से पहले और बाद में डीपफेक सामग्री का पता लगाया जाना चाहिए
2. रोकथाम: डीपफेक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए एक प्रभावी तंत्र होना चाहिए
3. रिपोर्टिंग: प्रभावी और शीघ्र रिपोर्टिंग और शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध होना चाहिए
4. जागरूकता: डीपफेक के मुद्दे पर व्यापक जागरूकता पैदा की जानी चाहिए
इसके अलावा, तत्काल प्रभाव से, MeitY डीपफेक के खतरे को रोकने के लिए आवश्यक नियमों का आकलन और मसौदा तैयार करने के लिए एक अभ्यास शुरू करेगा। इस प्रयोजन के लिए, MeitY MyGov पोर्टल पर जनता से टिप्पणियाँ आमंत्रित करेगा।
4-स्तंभीय संरचना को अंतिम रूप देने के लिए दिसंबर 2023 के पहले सप्ताह में संबंधित हितधारकों के साथ एक अनुवर्ती बैठक फिर से आयोजित की जाएगी। भारत सरकार प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर और सार्वजनिक जागरूकता को बढ़ावा देकर डीपफेक के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।

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