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आचार्य श्री विजयराजजी म.सा. व उपाध्याय श्री जितेशमुनिजी म.सा. का चातुर्मास उदयपुर में होगा

 महावीर अग्रवाल 

मन्दसौर २८ मार्च ;अभी तक;  मानव जीवन में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है शांति अर्थात सकुन। जीवन में यदि शांति नहीं है तो कुछ भी नहीं है। मनुष्य भव में जिसने भी जन्म लिया है वे सभी शांति (सकुन) चाहते है। हमारे जीवन में यदि शांति की कमी है तो इसका कारण क्या है ? इस पर विचार करे। जीवन में शांति को पाना है तो जीवन में चिंतन मनन करे, कभी क्रोध नहीं करे। अशांति को जीवन में स्थान नहीं देना चाहते है तो स्वयं शांत रहने का प्रयास करो।
                                         उक्त उद्गार परम पूज्य आचार्य श्री विजयराजजी म.सा.ने हर्ष विलास पैलेस में आयोजित धर्मसभा में कहे। आपने गुरूवार को देशभर से आये श्रीसंघों के प्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को कहा कि शांति की चाह में हम प्रार्थना करते है लेकिन फिर भी हमें शांति नहीं मिलती। शांति की चाह में संतों के पास जाते है उनके चातुर्मास कराते है लेकिन क्या हमें शांति (सकुन) का अनुभव होता है कि नहीं विचार करे जीवन में आशावादी बने निराशावादी रहेंगे तो हमें शांति का अनुभव नहीं होगा बल्कि हम और अधिक अशांति का अनुभव करेंगे इसलिये जीवन में निराश नहीं होवे।
                                उपाध्याय श्री जितेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि शांत क्रांति जैन श्रावक संघ से जुड़े सभी श्रावक श्राविकाये आचार्य श्री के प्रति अटूट श्रद्धा व विश्वास रखते है इसलिये आज चातुर्मास की विनती लेकर यहां आये है। आचार्य श्री का चातुर्मास कहा होगा यह तो आचार्य श्री ही बतायेंगे लेकिन हमें  चातुर्मास की स्वीकृति नहीं मिले तो निराश नहीं होना है बल्कि प्रभु महावीर की वाणी के प्रति समर्पण भाव रखते हुए श्री संघ में उत्कृष्ठ श्रावक श्राविका के रूप में कार्य करते रहना है। जिन श्रीसंघों को अन्य साधु साध्वियों के चातुर्मास मिले है वे जिन वाणी पर श्रद्धा रखते हुए पुरे चातुर्मास में उत्कृष्ट धर्म आराधना करें। आचार्य श्री चातुर्मास हेतु जिन साधु साध्वियों को आपके यहां भेजे उनका पूर्ण आदर सत्कार रखते हुए धर्म की प्रभावना करे।
                            धर्मसभा में इसके पूर्व जयपुर, ब्यावर, उदयपुर, इंदौर आदि कई श्रीसंघों के द्वारा आचार्य श्री विजयराजजी से वर्ष 2024 का वर्षावास (चातुर्मास) अपने-अपने नगरों में करने की विनती की गई। मंदसौर श्रीसंघ अध्यक्ष श्री विमल पामेचा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि होली चातुर्मास के दौरान आचार्य श्री की जो मंदसौर में स्थिरता रही उसके लिये हम सभी आचार्य श्री के आभारी है। आज होली चातुर्मास में बाहर से जो भी श्रीसंघ पधारे है हम उन सभी के प्रति आभारी है। मंदसौर श्रीसंघ को विगत 8 दिवस में आचार्यश्री के अमृतवाणी श्रवण करने का धर्मलाभ मिला है। मंदसौर श्रीसंघ के सभी उर्जावान साथियों ने होली चातुर्मास की व्यवस्थाओं में भरपूर सहयोग दिया है। धर्मसभा में श्रीसंघ के राष्ट्रीय महामंत्री विरेन्द्र जैन सीए, युवा संघ राष्ट्रीय महामंत्री निर्विकार रातड़िया ने भी अपने विचार रखे। धर्मसभा में श्री साधुमार्गी शांतक्रांति जैन श्रावक संघ राष्ट्रीय अध्यक्ष राजू भुरठ (चेन्नई), पूर्व अध्यक्ष गजराज जैन, महिला संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष अंजना कोचट्टा, सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक विपिन जैन सहित बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित थे। संचालन श्रीसंघ महामंत्री अनिल डूंगरवाल व शेखर कासमा ने किया।

चातुर्मास की स्वीकृतियां प्रदान की गई 
                                        धर्मसभा में आचार्य श्री विजयराजजी म.सा. ने आगामी चातुर्मासों की स्वीकृति प्रदान की। देशभर से आये विभिन्न श्रीसंघों की मौजूदगी में आचार्य श्री ने श्रीसंघ से जुड़े साधु-साध्वियों के चातुर्मास की घोषणा की। जिसके अनुसार आचार्य श्री विजयराजजी म.सा. एवं उपाध्याय श्री जितेशमुनिजी म.सा. आदि ठाणा का आगामी चातुर्मास उदयपुर (राज.), साधुश्रेष्ठ श्री पारसमुनिजी म.सा. आदि ठाणा 4 का चातुर्मास इंदौर जानकी नगर (म.प्र.), मुनिश्रेष्ठ श्री प्रेममुनिजी म.सा. आदि ठाणा 4 का चातुर्मास सूरत-वेसू (गुज.), श्री नवीनप्रज्ञजी म.सा. आदि ठाणा-5 का चातुर्मास वसई गांव (महा.), श्री कौशलमुनिजी म.सा. आदि ठाणा-3 का चातुर्मास ब्यावर (राज.), महाश्रमणीरत्ना महासती श्री सूर्यकांता जी म.सा. आदि ठाणा का चातुर्मास उदयपुर (राज.), महाश्रमणीरत्ना महासती श्री प्रभावतीजी म.सा. आदि ठाणा-7 का चातुर्मास आसीन्द (राज.), महासती श्री पुष्पावती म.सा. आदि ठाणा-4 का चातुर्मास सोजत रोड़ (राज.), महासती श्री कीर्तिश्री म.सा. आदि ठाणा-6 का चातुर्मास छनेरा (म.प्र.), महासती श्री इन्द्रप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा का चातुर्मास रामपुरा (म.प्र.), महासती श्री मृदुला  श्रीजी म.सा. आदि ठाणा का चातुर्मास भोपाल (म.प्र.) के लिये स्वीकृतियां प्रदान की गई है। इस धर्मसभा में अन्य साधु साध्वियों के भी चातुर्मास स्वीकृत किये गये है।

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